महिला एकता परिषद के सम्मेलन में जहां आवारा जानवरों के आतंक से खेती को हो रहे नुकसान पर चर्चा हुई, वहीं महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने के लिए बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। कई वक्ताओं ने बूढ़ी महिलाओं को पॉलिथीन में मडुवे का आटा देने के बजाए उन्हें वृद्धा पेंशन देने की वकालत की गई। महिलाओं ने पहाड़ से पलायन रोकने के लिए सरकार से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की।
घुघुती में हुए सम्मेलन की मुख्य अतिथि महिला एकता परिषद की संयोजिका अनुराधा पांडे ने कहा कि सरकार महिलाओं के विकास की बात करती है, लेकिन यह दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रहते हैं। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। जन सरोकार मंच के संयोजक मोहन कांडपाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की खेती बाड़ी चौपट है, सरकार वन्य जीवों का आतंक नहीं रोक पा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बूढ़ी महिलाओं को मडुवा दे रही है, इसके बजाए वृद्धावस्था पेंशन लगानी चाहिए। अध्यक्षा मोहनी देवी ने पहाड़ की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की। बालिका शिक्षा पर जोर देने की मांग भी उठी। अतिथि शिक्षकों को समय पर मानदेय देने, खेती किसानी के लिए योजना बनाने पर जोर दिया गया।
तय हुआ कि आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सुअर, बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों को साथ लेकर द्वाराहाट तहसील में प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर घुघुती, चौड़ा, सनणैं, शिलंग, कमराड़, बहेड़ा, धमेड़ा, मासौं सहित तमाम गांवों की महिलाएं मौजूद थीं।