अल्मोड़ा में एक दुकान के आगे बिक्री के लिए रखी पहाड़ी दालें। अअ
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पहाड़ की गहत, भट, रैंस आदि दालों का सीजन आ गया है। ठंड के दिनों में इन दालों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस बार गहत 130 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। दिल्ली, मुंबई सहित महानगरों में रहने वाले पहाड़ के लोग भी इन दिनों गहत, भट, रैंस, राजमा आदि दालों को मंगवा रहे हैं। विदेशों में रहने वाले पहाड़ी लोगों के पास भी यह दालें भेजी जा रही हैं। यही कारण है कि हर साल गहत और भट के दामों में उछाल आ रहा है।
जिले के धौलादेवी ब्लॉक के भनोली, पपोली, शहरफाटक और ताकुला सहित कई अन्य ब्लॉकों में गहत, भट आदि दाल की अच्छी पैदावार होती है। काश्तकार इन दालों को बाजार में बेच देते हैं। पिछले साल गहत 120 रुपये किलो बिक रही थी, लेकिन इस बार 130 रुपये किलो पहुंच गई है। हालांकि अन्य दालों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। गहत की दाल पथरी के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। इन दिनों लोग भट के चुड़काणी, डुबके, भट का जौला आदि का स्वाद भी लेते हैं। भट की दाल पीलिया आदि रोगों में फायदेमंद होती है। इन खड़ी दालों से बनने वाला रस (एक किस्म की दाल) भी बहुत स्वादिष्ट होता है। पहाड़ी दाल के विक्रेता खीमानंद भट्ट ने बताया कि गहत और भट की दाल की मांग ज्यादा है। हर रोज उनकी दुकान से दस किलो गहत बिक जाती है। इन दिनों दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू सहित देश के तमाम बड़े शहरों ही नहीं विदेशों में रहने वाले प्रवासी लोग भी गहत, भट, राजमा
आदि मंगवा रहे हैं। गहत, भट्ट के अलावा सोयाबीन, राजमा, उड़द जैसी दालों के अलावा पहाड़ी बड़ी, मूंग दाल की मंगोड़ी की भी काफी मांग है। पहाड़ी बड़ी चार सौ और मंगोड़ी तीन सौ रुपये किलो बिक रही है।