जिले के नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों मेें पिछले दो महीने से घरेलू गैस सिलेंडरों का संकट बना हुआ है। खासतौर पर धारानौला और चीनाखान क्षेत्र के लोग पिछले कई दिनों से सिलेंडरों के लिए जाम लगा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि चीनाखान में शुक्रवार सुबह आने वाली सिलेंडर की गाड़ी के इंतजार में लोग बृहस्पतिवार रात में ही लाइन में लग गए और पूरी रात सिलेंडरों का पहरा करते रहे।
लोगों ने बारी-बारी से सिलेंडरों की सुरक्षा की और सुबह तक वहां जमे रहे। सिलेंडर लेने वालों की भीड़ इतनी थी कि दो ट्रकों में 416 सिलेंडर बांटने के बाद भी करीब पांच दर्जन लोगों को निराश लौटना पड़ा। चीनाखान क्षेत्र में 26 अक्तूबर को गैस का ट्रक पहुंचा था पर उस दिन सिलेंडर नहीं मिल पाने से काफी लोगों को लौटना पड़ा था।
एक महीने से अधिक समय बीत जाने पर नाराज लोगों ने 25 नवंबर को चीनाखान में जाम लगा दिया। गैस एजेंसी ने शुक्रवार को गैस आपूर्ति करने का भरोसा दिया था। बृहस्पतिवार शाम छह बजे कुछ लोग सिलेंडर लेकर वितरण स्थल पर पहुंच गए। देखादेखी अन्य लोग भी पहुंचे और कुछ ही देर में लाइन बढ़ती गई।
कड़ाके की सर्दी में लोग रात भर सिलेंडरों की पहरेदारी करते रहे। रात एक बजे लाइन में सिलेंडरों की संख्या 150 से अधिक पहुंच चुकी थी। ठंड से बचने को कुछ लोगों ने घरों से चाय भी मंगवा ली। गरम कपड़ों से लकदक सिलेंडरों पर बैठ कर झपकी भी लेते रहे, जिनके पैर थक चुके थे वह शॉल ओढ़ कर सड़क पर ही बैठ लिए।
मजे की बात यह थी कि जो भी सिलेंडर लेकर पहुंचता वह पहले से लगे सिलेंडरों की गिनती कर रहा था, ताकि कोई मौके का फायदा उठा कर बीच में अपना सिलेंडर नहीं लगा ले। तड़के चार बजे तक सिलेंडरों की संख्या 310 पहुंच गई। अंधेरा छंटने के साथ ही लाइन में लगे सिलेंडरों की संख्या पांच सौ से अधिक पहुंच गई।
अब बेसब्री से सिलेंडर लेकर आ रहे ट्रक की प्रतीक्षा होने लगी। आशावादी लोग ट्रक पहुंचने की गारंटी दे रहे थे तो कुछ लोगों को आज भी ट्रक आने की उम्मीद नहीं थी पर उन्होंने लाइन नहीं छोड़ी। सुबह 7:30 सिलेंडर लेकर एक ट्रक पहुंचा। सिलेंडर वितरण के लिए 7:55 बजे गैस एजेंसी कर्मी पहुंचे।
उन्होंने बताया कि ट्रक में 180 घरेलू और 36 कामर्शियल सिलेंडर हैं। 8:50 बजे सिलेंडर खत्म हो गए। रात से लाइन में लगे लोग सिलेंडर नहीं मिलने पर आक्रोशित हो गए। कुछ देर बाद जब गैस कर्मियों ने बताया कि एक और ट्रक पहुंच रहा है तो लोगों को फिर से उम्मीद बंध गई। फोन पर ही मित्रों को भी खाली सिलेंडर लेकर बुला लिया।
9:10 बजे दूसरा ट्रक पहुंच गया। इस ट्रक में 236 घरेलू सिलेंडर थे। 9:45 बजे ट्रक में रखे सभी सिलेंडर बंट गए। अधिकांश लोगों का रात में जागना खाली नहीं गया, लेकिन करीब पांच दर्जन लोगों को गैस नहीं मिल सकी। लाइन तोड़कर बीच में कोई सिलेंडर नहीं लगा सके इसके लिए सभी चौकन्ने थे।
अंधेरे में लोगों की नजर बचाकर कुछ लोग जब बीच में सिलेंडर लगाने की कोशिश करते तो चौकन्नेे लोग उसे खरी खोटी सुनाकर सबसे पीछे जाने को मजबूर कर देते। गैस वितरण के दौरान पुलिस कर्मी पहुंचे थे, लेकिन स्वअनुशासन के चलते पुलिस कर्मियों को मेहनत नहीं करनी पड़ी।