चौखुटिया (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के दर्द से भरी गढ़वाली सीडी लोहबा मुल्क की छोरी लोब्याली का विमोचन अगनेरी मंदिर परिसर में किया गया। उत्तराखंड की दशा दिशा और पीड़ा को उकेरने के साथ ही पलायन का दंश झेलते पहाड़ को झंकृत करने वाली गढ़वाली गीतों से सराबोर सीडी लोहबा मुल्क की छोरी लोब्याली का विमाचन रामगंगा तट पर स्थित अगनेरी मंदिर में धूमधाम के साथ किया गया।
स्थानीय लोगों के साथ ही गढ़वाल के गैरसैंण, कुनीगाड़ आदि क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे थे। विमोचन के मौके पर निर्माता, निर्देशक विजय ममगाई, संगीतकार विनोद पांडे, गीतकार दीपक ममगाई, विजय ममगाई, डॉ. कुलदीप बिष्ट, जगत नेगी, दिनेश मनराल, हेम जोशी, नंदाबल्लभ जोशी, गजेंद्र नेगी, जीवन नेगी, गगन चौधरी, दरबान सिंह बिष्ट, महादेव बिष्ट, सतीश अग्रवाल समेत गढ़वाल से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे थे।
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। लोहबा मुल्क की छोरी लोब्याली सीडी के गीत उत्तराखंड के ताजा हालातों, विषम परिस्थितियों के साथ ही प्रवासियों के घर लौटने का संदेश देने में कामयाब रही है। सेना में सेकेंड कमीशन ऑफिसर कुनिगाड़ निवासी गीतकार दीपक ममगाई, उनके भाई इंडिया टीवी में कैमरामैन विजय ममगाई ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ममगाई प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले सीडी बनाई है।
कैसेट के एक गीत में घर छूटी गै बार छूटी गे हरी भरी सार छूटी गे में पलायन की पीड़ा को उकेरा गया है तो बदलते खानपान पर तंज कसते हुए मडुवा, झुंगर हरै गे, चाउमीन खोजंण रैगो को बेहतरीन स्वर दिए गए हैं। गीतों में केदार नाथ की त्रासदी के साथ ही देवी, देवताओं का आह्वान गीत गाया गया है। अगनेरी माता की महिमा का भी बखान किया गया है।
इसी के चलते विमोचन के लिए अगनेरी मंदिर परिसर को चुना गया है। दीपक ममगाई बताते हैं कि वे एक ओर जहां सेना में तैनाती के दौरान अपनी देश की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की दशा और दिशा ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया है। भविष्य में उनकी योजना चौखुटिया, गैरसैंण के बीच कार्यालय खोलकर पहाड़ के युवाओं के लिए गायकी के क्षेत्र में कुछ करने की है। कैसेट में दीपक के अलावा उत्तराखंड की प्रसिद्ध गायिका मीना राणा, दीपक ममगाई ने भी स्वर दिया है।