जिले को लेकर राजनैतिक दलों में बयानबाजियों को दौर शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष के बाद अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैठक कर नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के जिले से संबंधित शासनादेश को बहाल करने वाले बयान को हास्यास्पद बताया है। नसीहत दी कि जिले शासनादेश से नहीं वरन अधिसूचना जारी होने से बनते हैं।
नगर अध्यक्ष कैलाश पांडे ने कहा कि जब भट्ट पहली बार विधायक बने तब बागेश्वर, चंपावत जिले की घोषणा हुई। ये सभी जिले शासनादेश की बजाय अधिसूचना के माध्यम से बने थे। 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने चार जिलों की घोषणा तो की लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कुंभ घोटाले के आरोप में निशंक को हटाकर जनरल खंडूरी को कमान सौंपी और मुख्यमंत्री खंडूरी ने जिले के मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
तमाम दबावों के बावजूद भाजपा ने अधिसूचना जारी नहीं की, जबकि तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल, वर्तमान विधायक अजय भट्ट सहित कई वरिष्ठ नेताओं से भी अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया गया था। भट्ट कहते हैं कि जिले के लिए वह मुख्यमंत्री को 408 पत्र लिख चुके हैं, जबकि हकीकत यह है कि भट्ट ने जिले की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात वार्ता तक नहीं की। जिला महामंत्री अजय बबली ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जिले के लिए पत्र लिखने की बात जनता को गुमराह कर रहे हैं।
कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत शीघ्र रानीखेत सहित कई जिलों की घोषणा करेंगे और अधिसूचना जारी करेंगे। बैठक में जयंत रौतेला, कुलदीप कुमार, प्रदीप मेहरा, पान सिंह, सोनू कुरैशी, विनीत चौरसिया आदि थे।