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गांधी जी की खादी भी जीएसटी की चपेट में

Tue, 24 Oct 2017 10:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा का गांधी आश्रम। - फोटो : अमर उजाला
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 लोगों को भरोसा था कि देश को अलग पहचान दिलाने वाली खादी को जीएसटी से मुक्त रखा जाएगा और लोगों को हर साल की तरह सीजन में गांधी आश्रम में बिकने वाले ऊनी कपड़ों और अन्य सामग्री की खरीद पर गांधी जी के जन्म दिन (दो अक्तूबर) से 30 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी, लेकिन खादी भी जीएसटी की चपेट में आ गई है। यही नहीं खादी को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ सरकार ने पहली दफा खादी के वस्त्रों में मिलने वाली छूट 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दी और वहीं 12 प्रतिशत जीएसटी वसूला जा रहा है जिससे उपभोक्ताओं को इस बार खादी के वस्त्रों में सिर्फ 13 प्रतिशत छूट मिल रही है। इससे गांधी आश्रमों में बिकने वाले खादी के कपड़ों की बिक्री आधी रह गई है। 
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गांधी आश्रम में बिकने वाले ऊनी कपड़ों और अन्य सामग्री पर हर साल दो अक्तूबर से करीब साढ़े तीन माह तक 30 प्रतिशत की छूट मिलती है। लोग हर साल इस छूट का इंतजार करते हैं और जाड़े आने से पहले गांधी आश्रम में बने ऊनी कपड़े, कोट, वास्केट आदि के अलावा कंबल, रजाई, पशमीना सहित अन्य सामग्री खरीद लेते हैं। लोगों को भरोसा था कि गांधी आश्रम में जीएसटी का कोई असर नहीं पड़ेगा और हर साल की तरह ऊनी कपड़ों आदि की खरीद में 30 प्रतिशत की छूट मिलेगी, लेकिन सरकार ने खादी पर दोहरी मार की है। पहली बार छूट 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दी है वहीं 12 प्रतिशत जीएसटी वसूला जा रहा है। जिससे उपभोक्ता को 30 प्रतिशत के बजाय सिर्फ 13 प्रतिशत ही छूट मिल पा रही है।  

मसलन गांधी आश्रम में बीते साल 1400 रुपये कीमत वाली स्वेटर 30 प्रतिशत छूट के बाद 980 रुपए में मिल रही थी, लेकिन इस बार 1400 रुपये कीमत वाली स्वेटर छूट के बाद 1176 रुपए में मिल रही है। इसी तरह 2480 रुपये कीमत में बिकने वाली गांधी आश्रम की रजाई पर पिछले साल 744 रुपये की छूट थी, लेकिन इस बार छूट घटकर 396 रुपये रह गई है। गांधी आश्रम अल्मोड़ा के प्रबंधक प्रमोद वर्मा ने बताया कि गांधी आश्रम में मुख्य बिक्री दो अक्तूबर से शुरू होने वाली छूट हर साल 108 दिनों तक रहती है, लेकिन इस बार उपभोक्ताओं को 30 प्रतिशत के बजाय सिर्फ 13 प्रतिशत छूट मिल पा रही है जिससे बिक्री में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल अक्तूबर माह में अल्मोड़ा के गांधी आश्रम से 15 लाख रुपये की बिक्री हुई थी, लेकिन इस बार 24 अक्तूबर तक सिर्फ छह लाख की बिक्री हुई है। माह के अंत तक यह अधिकतम आठ लाख तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि छूट नहीं मिलने के कारण तमाम खरीददार दाम पूछने के बाद वापस लौट रहे हैं। बताया गया है कि अल्मोड़ा के अलावा रानीखेत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत अन्य गांधी आश्रमों में भी बिक्री में काफी कमी आई है।   
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