उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंध परियोजना देहरादून के तत्वावधान में सिविल और सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा के अंतर्गत डोल आश्रम सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य में शुरू की गई जायका परियोजना का प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य वन संरक्षक और मुख्य परियोजना निदेशक अनूप मलिक ने परियोजना के बारे में कार्मिकों को जानकारी दी।
परियोजना निदेशक एसएम जोशी ने बताया कि जापान सरकार की वित्तीय मद से राज्य में यह परियोजना शुरू की गई है जो करीब 800 करोड़ रुपए की है। उन्होंने बताया कि परियोजना राज्य के 13 जिलों के वन प्रभागों में शुरू की गई है।
इसका एक मद आपदा से प्रभावित जिलों में वन संचार साधनों के जीर्णोद्धार तथा दूसरा मद वनों की दशा को सुधारने पर खर्च किया जाएगा। तीन वन प्रभागों में प्रत्येक प्रभाग में तीन रेंजों का चयन किया गया है।
चयनित रेंज में 10 से 15 वन पंचायतों का चयन कर शामिल किया गया है। वन संवर्धन कार्यों में ईको रेस्टोरेशन, जैव विविधता सुधार आदि कार्य शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित चारा विकास और जल संरक्षण कार्य भी योजना में शामिल किए गए हैं। इन वन पंचायतों के समीप गांवों में आजीविका सुधार के काम भी किए जाने हैं।
उन्होंने बताया कि आजीविका सुधार के अंतर्गत स्थानीय लोगों की आय में सुधार करते हुए वनों की दशा में सुधार करना मुख्य उद्देश्य है। परियोजना कार्यों के लिए डिविजनल मैनेजमेंट यूनिट और फील्ड मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की गई हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक, अपर प्रमुख वन संरक्षक डीवीएस खाती, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डा. राजेंद्र सिंह बिष्ट, वन संरक्षक उतरी कुमाऊं संतोष विजय शर्मा, डीएफओ चंपावत अशोक गुप्ता समेत वन प्रभाग पिथौरागढ़, चंपावत वन प्रभाग, सिविल और सोयम वन प्रभाग, बागेश्वर वन प्रभाग के चयनित रेंजों के रेंज अधिकारी और कर्मचारी आदि मौजूद थे। संचालन सिविल सोयम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चंद्र ने किया।