अल्मोड़ा। मैदानी जिलों में तेजी से फैल रहा स्वाइन फ्लू अब पहाड़ तक पहुंच गया है। अल्मोड़ा में एक साथ चार मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। संक्रमित पाए गए सभी लोग हाल ही में दिल्ली और देहरादून की यात्रा से लौटे थे। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने खतरे को देखते हुए बेस अस्पताल में 30 बेड का स्पेशल वार्ड बनाया है।
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में तेजी से फैल रहा स्वाइन फ्लू पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी खतरा बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमण की चपेट में आए चारों लोग देहरादून और दिल्ली की यात्रा पर थे। वहीं प्रवास के दौरान वे इस वायरस का शिकार हुए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तुरंत अलर्ट हो गया है। संक्रमितों में से तीन मरीजों को उनके घरों में ही आइसोलेट कर कड़ी निगरानी में रखा गया है। एक संक्रमित बच्चे की हालत को देखते हुए उसे बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन ने स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए मुस्तैदी बढ़ा दी है।
इन बातों का रखें ध्यान
-भीड़भाड़ वाले इलाकों या अस्पतालों में जाते समय एन 95 या सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल करें।
- जिन लोगों को सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण हों, उनसे कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-यदि आप हाल ही में दिल्ली, देहरादून या किसी अन्य अत्यधिक संक्रमित क्षेत्र से लौटे हैं, तो कुछ दिनों तक अपनी सेहत पर नजर रखें और लक्षण दिखने पर तुरंत खुद को आइसोलेट कर लें।
- यदि आपको तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या छाती में दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
यात्रा से संक्रमित होकर लौटे मरीजों के बाद आपात स्थिति के लिए अस्पताल में विशेष आरक्षित वार्ड तैयार कर दिया है। बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई देने पर आम जनता से अपील है कि वे बिना लापरवाही किए तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों से संपर्क करें। - डॉ. दिनेश चंद्र पुनेरा, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल, अल्मोड़ा