बारह वर्ष बाद भी चार किमी लंबी चनौदा-भेटाबड़सीला सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इससे क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों की करीब दो हजार की आबादी को यातायात की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण विधानसभा चुनाव का बहिष्कार भी कर चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो 2019 के लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार होगा। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया है।
मार्ग निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आरपार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सड़क संघर्ष समिति भेटा बड़सीला सैजारी गठित की है। ग्रामीणों ने बताया कि 2005 में चनौदा-भेटाबड़सीला सड़क स्वीकृत हुई। लोनिवि दो बार समरेखण कर चुका है। आरोप लगाया कि प्रशासन की ढिलाई के कारण सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए गुरुड़ा और शैल के ग्रामीण भूमि देने का विरोध कर हैं, जबकि वह भूमि बेनाप है। प्रशासन और लोनिवि को भूमि की सत्यता की जांच कर जल्द सड़क का निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए।
यदि यह सड़क बन जाती है तो सैजारी, भेटा, बड़सीला, तीताकोट, धलरखोला, मेल्टी के लोग लाभान्वित होंगे, इन गांवों में करीब दो हजार आबादी निवास करती है। ग्रामीण चार से पांच किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं। मरीजों और गर्भवती को डोली में लाना ग्रामीणों की मजबूरी है। ग्रामीणों ने धमकी दी है कि यदि सड़क नहीं बनी तो 2019 में भी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जागा। ग्रामीण इस संबंध में पूर्व में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे चुके हैं। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में भेटा बड़सीला के प्रधान आनंद राम, संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रकाश राम, उपाध्यक्ष कमल कुमार, सचिव रमेश कुमार आदि शामिल हैं।