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‘सुखी गलाड़, फाटी कोट, जसुका कैं दियो वोट’

Fri, 13 Jan 2017 11:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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पूर्व विधायक स्व. जसवंत बिष्ट - फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व विधायक स्व. जसवंत सिंह बिष्ट (जसुका) धनबल के युग के नेताओं के लिए नजीर हैं।  उनकी सादगी और ईमानदारी के चर्चे आज भी लोग याद करते हैं। विधानसभा जाने के लिए जहां वह रिक्शे का इस्तेमाल करते थे, वहीं रोडवेज की बस में लखनऊ आवाजाही होती थी। 1980 में विधायक बनने के बाद जब उनकी पत्नी का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ा तो जानवरों के चारे के लिए उन्होंने स्वयं दराती थाम ली। चुनाव के दौरान कार्यकर्ता सुखी गलाड़, फाटी कोट, जसुका कैं दियो वोट जैसे नारों के माध्यम से उनका प्रचार करते थे। 
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सुदूरवर्ती स्याल्दे के तिमली गांव निवासी स्व. बिष्ट 1944 में ग्वालियर में पहली बार प्रखर समाजवादी नेता स्व. राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आए। इसके बाद वह गांव लौटकर सामाजिक कार्यों में मशगूल हो गए। 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की तरफ से बिष्ट ने पहली बार रानीखेत उत्तरी द्वाराहाट क्षेत्र से चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद 1972 में वह ब्लॉक प्रमुख बने।

1979 में यूकेडी के उदय के साथ ही स्व. बिष्ट पार्टी में शामिल हुए और 1980 में रानीखेत क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी स्व. पूरन माहरा को 251 वोटों से पराजित किया। 1989 में फिर से वह क्षेत्र के विधायक चुने गए। बताते हैं कि चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे, तो कार्यकर्ता एक नोट एक वोट का नारा देते थे। 1991 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए, लेकिन चुनाव हार गए। राज्य बनने के बाद 2002 में स्व. बिष्ट ने फिर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए, अलबत्ता उनकी सादगी के चर्चे आज भी याद हैं।
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रानीखेत। यूकेडी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह माहरा बताते हैं कि जब स्व. बिष्ट विधायक थे तो उन्होंने कभी होटल में खाना नहीं खाया। वह अपने परिचित के यहां जाकर खिचड़ी बनवाते थे। सभी अधिकारी-कर्मचारियों के बीच वह चाचा के नाम से प्रसिद्ध थे। 
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