अल्मोड़ा। वन बीट अधिकारी और वन आरक्षी संघ की बैठक में विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने अल्मोड़ा वन प्रभाग में लीसा कार्य के 90 फीसदी ठेके स्थानीय लीसा फैक्टरी मालिकों और उनके प्रतिनिधियों को देने पर रोष व्यक्त किया गया। उन्होंने लीसा ठेकेदारों पर फील्ड स्टाफ के साथ अभद्रता करने और डराने धमकाने का आरोप लगाया। वन आरक्षियों ने लीसा कार्य के पूर्ण बहिष्कार का एलान किया है। बाद में मांगों को लेकर डीएफओ को ज्ञापन सौंपा गया।
उन्होंने कहा कि विभाग में फील्ड में नियमित कर्मचारियों की काफी कमी है। इससे आरक्षियों पर कार्य का अधिक दबाव है। एक आरक्षी पर तीन से चार बीटों का कार्य है, जबकि द्वाराहाट रेंज में एक वन बीट प्रभारी पांच से सात बीट का कार्य देख रहा है। एक नवंबर से प्रभाग स्तर से प्रत्येक बीट में एक-एक बीट वाचर की तैनाती की मांग की गई और अतिरिक्त कार्य स्वत: छोड़ने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रभाग स्तर से जंगलों की देखरेख और लीसा कार्य के लिए वाचरों की तैनाती की जाए। रेंज स्तर पर तैनात दैनिक श्रमिकों को पिछले सवा साल से पारिश्रमिक भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वन आरक्षी पिछले पांच सालों से वर्दी से वंचित हैं। वन आरक्षियों के निवास के लिए बनीं चौकियों का जीर्णोद्धार करने, पहचान पत्र देने और रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की गई। पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को भी समर्थन जताया गया। वन आरक्षी संघ अल्मोड़ा के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने अध्यक्षता की। वक्ताओं में उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह सतवाल, संजय सिंह रावत, गोपाल सिंह, कृष्ण कुमार, जगदीश चंद्र सिंह, किशोर उपाध्याय, रोशन कुमार, त्रिभुवन उपाध्याय, खजान मेहता, किशोर कुमार, किरन तिवारी, इंदू मर्तोलिया ने भाग लिया।