सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु के लिए मंदिरों और अन्य स्थानों पर सामूहिक रूप से वट सावित्री की पूजा की। सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार धारण करने के बाद महिलाओं ने सत्यवान, सावित्री की पूजा की और उनकी कथा भी सुनी। इस दौरान भजन कीर्तन भी हुए और प्रसाद वितरण किया गया।
इस पूजा में वट वृक्ष का खास महत्व है। माना जाता है कि वट वृक्ष में भगवान, ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। मान्यता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही अपने मृत पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस मांग लिए थे।
वट वृक्ष में जल अर्पण, हल्दी का तिलक, सिंदूर और चंदन का लेप लगाने और पूजा के बाद ही महिलाएं जल ग्रहण करती हैं। इधर नगर के विभिन्न मंदिरों, घरों में सामूहिक रूप से महिलाओं ने सत्यवान, सावित्री की पूजा की। रघुनाथ मंदिर में हुई सामूहिक पूजा में लीला बोरा, माया जोशी, नीलम साह, भावना साह, सोनी साह, आशा उपाध्याय, ममता बिष्ट, मनीषा पांडे, कमला पांडे, दया बोरा, चंद्रा बिष्ट, सुरभि बिष्ट समेत काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
पंडित नीरज लोहनी ने पूजा संपन्न कराई। इधर पूर्वी पोखरखाली में भी जानकी पंत के आवास में भी सामूहिक रूप से वट सावित्री की पूजा संपन्न हुई। इस मौके पर रेखा जोशी, भावना पांडे, ज्योति पंत, बीना जोशी, माया जोशी, अल्पना पांडे समेत काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।