अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य बनने के 22 साल बाद भी जिला पूर्ति विभाग के खाद्यान्न गोदामों को छत नसीब नहीं हुई। 12 खाद्यान्न गोदाम अब भी किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं, कई भवनों की हालत जर्जर है। बरसात के दिनों में गोदामों में रखे राशन के खराब होने की आशंका रहती है।
जिले में कुल 22 राजकीय खाद्यान्न गोदाम हैं, कई खाद्यान्न गोदामों के पास अपने भवन तक नहीं हैं। जिला पूर्ति विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में रानीखेत, सोनी, भतरौंजखान, जालली, अल्मोड़ा, भनोली, ध्याड़ी, दन्यां, सराईखेत, स्याल्दे, चौखुटिया, बग्वालीपोखर में स्थित खाद्यान्न गोदाम कई सालों से किराये के भवनों में संचालित हो रहे है।
जिला मुख्यालय में भी विभाग के पास अपना गोदाम नहीं है। खाद्यान्न गोदाम माल रोड स्थित किराये के भवन में संचालित हो रहा है। भवन की हालत भी अच्छी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में स्थित कुछ खाद्यान्न गोदामों के भवन जर्जर हालत में है। कुछ भवनों की छत भी जीर्णशीर्ण है। बारिश होने पर छत से पानी टपक कर अंदर आता है।
भवनों में सीलन भी रहती है, इस वजह से कई बार गोदामों में रखा जाने वाला गेहूं, चावल, चीनी समेत अन्य राशन खराब होने की आशंका रहती है। सस्ता गल्ला विक्रेता कई बार सीलन युक्त राशन आने की शिकायत करते रहते हैं लेकिन अब तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
हमारे पास कुल 22 खाद्यान्न गोदाम है। सरकारी भवन न होने से वर्तमान में कई गोदाम किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। गोदामों के निर्माण के लिए भूमि तलाशी जा रही है।
दिव्या पांडे, जिला पूर्ति अधिकारी अल्मोड़ा