रानीखेत (अल्मोड़ा)। दावानल रोकने के लिए वन विभाग ने कमर कसनी शुरू कर दी है। स्थानीय रेंज कार्यालय में वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह के तहत हुई गोष्ठी में वनाग्नि रोकने के लिए स्वयं सहायता समूहों, नवयुवक, महिला मंगल दलों को भी जोड़ने पर जोर दिया गया। रेंजर उमेश पांडेय ने वनों का महत्व बताया। कहा कि वनों की सुरक्षा का दायित्व सभी के ऊपर है। आगामी चुनौती को लेकर उन्होंने सभी से सहयोग की अपील की।
वन पंचायत सरपंचों, सदस्यों, विभागीय कर्मचारियों ने भी वनों की सुरक्षा को लेकर तमाम सुझाव रखे। समय पर उपकरण उपलब्ध कराने, क्रू स्टेशनों को सशक्त बनाने सहित तमाम मसलों पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। तय हुआ कि 15 फरवरी तक कंट्रोल बर्निंग का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद आरक्षित वन क्षेत्रों में फायर ड्रिल किया जाएगा।
रेंजर ने अनुभाग अधिकारियों को आरक्षित वन क्षेत्र के करीबी गांव, पंचायतों में अग्नि सुरक्षा समितियों के गठन करने के निर्देष दिए। वनाग्नि की घटनाओं में महिला मंगल दल, नवयुवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़कर उनसे सहयोग लेने पर भी सहमति बनी। गोष्ठी में तमाम सरपंच, कर्मचारी, अधिकारी थे।
अल्मोड़ा। सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा बिनसर वन क्षेत्र के कफड़खान अनुभाग के अंतर्गत जाखसौड़ा, भेटुली में हुई वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठियों में वनों को आग से बचाने पर जोर दिया गया। कनिष्ठ उप प्रमुख जगमोहन सिंह ने वन विभाग, ग्रामीणों के बीच तालमेल पर जोर दिया। वन पंचायत सरपंच चंदन सिंह ने वनों में गिरे सूखे वृक्षों को जंगल से हटाने की मांग की।
संचालन करते हुए वन दरोगा जीवन तिवारी ने वनाग्नि रोकने के उपाय बताए। प्रधान हर्ष सिंह ने अध्यक्षता की। बैठक में चंदन सिंह, नवीन चंद्र, बलवंत सिंह, हरीश राम, उदय सिंह, भूपेंद्र सिंह, महेश देवड़ी, हरीश सिंह, पान सिंह, नंदन राम, कमल राम, अनिल कुमार, कुंदन राम, बालम राम, हरीश, बलवंत राम, बालम सिंह आदि थे।