जागेश्वर (अल्मोड़ा)। माता कोटगाड़ी को समर्पित किए गए फूलई जागेश्वर वन पंचायत के जंगल में आग धधक गई। हवा चलने से आग ने पूरे जंगल को चपेट में ले लिया। आग से बांज, उतीश, चीड़ के पेड़ों समेत अन्य वन संपदा जलकर राख हो गई।
शनिवार की सुबह वन पंचायत ने फूलई जागेश्वर का जंगल माता कोटगाड़ी को समर्पित किया था। माता कोटगाड़ी के झंडों से जंगल का सीमांकन भी किया गया था। वन पंचायत ने आगामी पांच वर्षों के लिए जंगल को बंद रखने का निर्णय लेते हुए इसे माता कोटगाड़ी को समर्पित किया था। जंगल माता को समर्पित करने के कुछ समय बाद ही देर शाम जंगल में आग धधक गई। हवा के झोके से आग तेजी से पूरे जंगल में फैल गई। देखते ही देखते आग ने पेडों और अन्य वन संपदा को आगोश में ले लिया। जंगल से आग के लपटे देखकर किसी ने सरपंच गोकुल प्रसाद को सूचना दी।
सरपंच ने वन विभाग को सूचित किया। महामंडलेश्वर लाल बाबा, स्थानीय लोग और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गए। काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। रविवार सुबह फिर जंगल में आग लग गई। सूचना मिलने पर लोग मौके पर पहुंचे और आग बुझाई। आग बुझाने वालों में वन दरोगा लक्ष्मण सिंह, वन बीट अधिकारी कुंदन सिंह, जगदीश पाटनी, सिरौदा मंतोला गुठ सरपंच भगवान भट्ट, कुंदन सुयाल, दीपक नेगी आदि शामिल रहे।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि फूलई जागेश्वर का जंगल माता कोटगाड़ी को समर्पित करने के निर्णय से कुछ लोग असंतुष्ट है। आशंका है कि असंतुष्ट लोग भी जंगल में आग लगा सकते हैं। लोगों का कहना है कि माता न्यायकारी है इस पर माता स्वयं विचार करेगी। सरपंच गोकुल प्रसाद ने कहा कि वन पंचायत को बंद रखने के निर्णय से कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है लेकिन जंगल में आग लगाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले के संज्ञान में आने पर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।