छह तहसीलों को जोड़ने वाले एकमात्र बड़े राजकीय अस्पताल की व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं। अस्पताल में अधिकांश डाक्टरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिस कारण दूर दराज से आने वाले मरीजों की फजीहत हो रही है। स्थानांतरण के एक साल बाद भी स्थायी एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है, रोगियों को एक साल तक निजी अस्पतालों में महंगे एक्सरे कराने पड़े। दो दिन पूर्व ही अस्थायी टेक्नीशियन की नियुक्ति की गई है।
मालूम हो कि राजकीय अस्पताल में रानीखेत के अलावा भिकियासैंण, सल्ट, स्याल्दे, देघाट, सराईखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, कर्णप्रयाग क्षेत्र से रोगी पहुंचते हैं।अस्पताल में प्रतिदिन 250 से 300 रोगी उपचार को आते हैं, लेकिन रोगियों को यहां आकर जब संबंधित डाक्टर नहीं मिलते तो बड़ी फजीहत होती है। अस्पताल में वर्तमान में रेडियोलाजिस्ट, कार्डियोलाजिस्ट, ईएनटी, एक्सरे टेक्नीशियन और ईएमओ के पदों पर एक भी डाक्टर नहीं हैं। जबकि बेहोशी, पैथोलाजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ में दो-दो पदों के सापेक्ष सिर्फ एक-एक डाक्टर तैनात हैं।
अभाव के चलते रोगियों को हल्द्वानी अथवा अन्यत्र रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल की सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही है। यहां सफाई व्यवस्था ठेके पर दी गई है। रोगियों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने के कारण बदबू के चलते जीना दूभर हो रहा है। एक्सरे टेक्नीशियन नहीं होने के कारण रोगियों को एक्सरे के लिए निजी अस्पतालों में महंगा एक्सरे कराना पड़ रहा है। हालांकि दो दिन पहले अस्थायी टेक्नीशियन की नियुक्ति कर दी गई है। रोगियों का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त दवाइयां तक नहीं मिल रही हैं। जिस कारण बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।