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डेढ़ करोड़ मंजूर पर नहीं हो सका जागेश्वर का विकास

Sun, 18 Oct 2015 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
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विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल में हालात कुछ और हैं। जागेश्वर में पर्यटन विकास के लिए पर्यटन विभाग के अंतर्गत डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से ईको हट्स, सामुदायिक भवन समेत अन्य सुविधाएं जुटाने की योजना पिछले तीन साल से अधर में लटकी है। जबकि इस योजना के लिए डेढ़ करोड़ रुपये मंजूर हैं और 12 नाली जमीन भी पर्यटन विभाग के नाम कर दी गई है।
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जागेश्वर क्षेत्र में पर्यटन विकास के लिए शासन ने तीन साल पहले पर्यटन विभाग को करीब डेढ़ करोड़ रुपये अवमुक्त किए। इस धनराशि से पांच ईको हट्स, सामुदायिक सभागार, पर्यटक छतरी, पार्किंग, शौचालय निर्माण आदि कार्य प्रस्तावित थे।

पर्यटन विभाग ने इस काम के लिए जल निगम निर्माण खंड की पिथौरागढ़ शाखा को कार्यदायी संस्था बनाया। जल निगम द्वारा आरतोला के पास निर्माण कार्य शुरू करते ही वन विभाग की आपत्ति के बाद काम रुक गया।
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इसके बाद प्रशासन ने झांकरसैम में भूमि का चयन किया। लंबी कार्रवाई के बाद करीब एक साल पहले यह भूमि पर्यटन विभाग के नाम हुई, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका।

बताया जाता है कि जल निगम पिथौरागढ़ शाखा ने यह काम विभाग की रुद्रपुर शाखा को हस्तांतरित किया, लेकिन रुद्रपुर शाखा भी काम कराने को इच्छुक नहीं है।

पर्यटन विकास के लिए शासन से बजट मिलने के बावजूद कार्यदायी संस्थाओं द्वारा समय पर काम शुरूनहीं कराना काम के प्रति गंभीर लापरवाही है। तीन साल पहले की और वर्तमान दरों में परिवर्तन हो जाने से योजना की लागत काफी बढ़ जाएगी।
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