सौनी में निर्माणाधीन ईको टूरिज्म कारिडोर के शीघ्र अस्तित्व में आने की उम्मीद है। क्षेत्र में ईको टूरिज्म की और अधिक संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से ईको टूरिज्म टीम के अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने क्षेत्र का निरीक्षण कर ग्रामीणों से भी सीधा संवाद कायम किया।
मालूम हो कि इस योजना से ग्रामीणों को भी सीधे रोजगार से जोड़ने की मंशा है। सघन वन क्षेत्र सौनी सहित आसपास के इलाकों में ईको टूरिज्म के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसी उद्देश्य से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस योजना को मंजूरी दी। वन विभाग ने 70 लाख रुपये की इस योजना का सौनी में निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, इसके तहत नौ हट, डायनिंग हॉल बन चुके हैं, जबकि स्वीमिंग पूल सहित तमाम कार्य होने हैं।
क्षेत्र को ईको टूरिज्म के रूप में और अधिक विकसित कैसे किया जाए, इस उद्देश्य से बुधवार को ईको टूरिज्म के अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। योजना से ग्रामीणों को भी जोड़ना है, इसके लिए टीम ने ग्रामीणों से भी वार्ता कर उनके सुझाव लिए। टीम में ईको टूरिज्म के सलाहकार प्रेम कुमार, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ गाविन वेल, राष्ट्रीय विशेषज्ञ एसएस माहर, वन क्षेत्राधिकारी उमेश चंद्र पांडे आदि शामिल थे। मालूम हो कि सौनी ईको टूरिज्म योजना का संचालन सीधे ग्रामीणों के माध्यम से होना है। वन क्षेत्राधिकारी उमेश पांडे ने बताया कि तीन से चार महीने में यह कारिडोर अस्तित्व में आ जाएगा।