छठवीं कक्षा में हिंदी माध्यम से मिला विज्ञान का प्रश्नपत्र
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निरंकुश हो चुके शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही ने जूनियर कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की धज्जियां उधेड़ कर रख दी हैं। तीन दिन से लगातार हो रही गलतियों के नए कीर्तिमान बन रहे हैं, लेकिन अफसोस कि व्यवस्था खामोश है। बृहस्पतिवार को जूनियर छह, सात और आठ की परीक्षा में छठवीं में विज्ञान अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया गया जबकि पेपर हिंदी माध्यम का मिला है। इसी तरह सातवीं और आठवीं कक्षा के पेपर भी पुराने पाठ्यक्रम के ही थे।
सोमवार को जूनियर हिंदी और बुधवार को सामाजिक विज्ञान के बाद बृहस्पतिवार को विज्ञान परीक्षा में भी पुराने ही पाठ्यक्रम का प्रश्नपत्र दिया गया है। सबसे शर्मनाक बात तो यह रही कि छठवीं कक्षा के छात्रों को विज्ञान विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया गया था जबकि प्रश्नपत्र हिंदी माध्यम का दिया गया। प्रश्नपत्र मिलते ही संबंधित परीक्षार्थी बगलें झांकते नजर आए। बाद में शिक्षकों ने आनन-फानन मे छठवीं कक्षा के अंग्रेजी माध्यम से पेपर तैयार किए। सातवीं और आठवीं कक्षा के प्रश्नपत्र भी संशोधित किए गए।
अपनी गलती छुपाने को शिक्षकों को दोष देना गलत
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। राजकीय शिक्षक संघ ने इस स्थिति को लेकर रोष जताते हुए आपात बैठक की है। इस मौके पर वक्ताओं का कहना था कि शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी गलती छुपाने के लिए शिक्षकों पर दोष मढ़ रहे हैं जो सरासर गलत है। इसके लिए कौन शिक्षक जिम्मेदार है उसका नाम उजागर करना चाहिए। बैठक के बाद शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष भारतेंदु जोशी ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
जांच की बात से आगे कुछ नहीं कह पा रहे अधिकारी
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी भी तीन दिन से सिर्फ मामले की जांच कराने के अलावा कोई और बात नहीं कह रहे हैं। जानकारी के अनुसार कमीशनखोरी के चक्कर में प्रश्नपत्र बनाने का ठेका सीधे बाहरी प्रकाशक को देने से यह नौबत आई है। जानकारों का कहना है कि यदि इसमें संबंधित विषयों के शिक्षकों के सुझाव और मार्गदर्शन लिया गया होता तो परीक्षा का ऐसा मजाक नहीं बनता। इस मामले में बार-बार शिक्षक पर अंगुली उठाने से भी शिक्षक संघ नाराज हैं। शिक्षकों का कहना है कि अधिकारियों की फौज खड़ी करने से भी समस्या बढ़ी है।