एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिनी सांस्कृतिक समारोह युवा उत्सव में दूसरे दिन छात्र-छात्राओं ने सामाजिक समस्याओं, सोशल नेटवर्किंग साइट्स के दुरुपयोग, बेरोजगारी, पलायन आदि पर नाटकों की प्रस्तुति दी। कुमाऊं विवि के कुलगीत से कार्यक्रम का आगाज हुआ।
शिक्षा संकाय के विद्यार्थियों ने युवाओं की विभिन्न समस्याओं, लिंगभेद, शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार पर कटाक्ष किया। कला संकाय ने आधुनिक युग की दशा में कुमाऊंनी समाज पर प्रहसन प्रस्तुत किया। शिक्षा संकाय ने हास्य नाटक गुरु-चेले की चार सौ बीसी के माध्यम से गुरु-शिष्य के बीच वर्तमान रिश्तों को समाने लाने का प्रयास किया। शिक्षकों में हो रहे नैतिक पतन और छात्रों द्वारा अपनी सीमाएं लांघने पर व्यंगात्मक रूप में कटाक्ष किया। कला संकाय ने बिगड़ती शिक्षण व्यवस्था, बेरोजगारी, निर्धनता को नाटक के माध्यम से सामने रखा। विज्ञान संकाय के हास्य नाटक बुद्धिबल्लभ ने दर्शकों को हंसने को मजबूर कर दिया। छात्र-छात्राओं ने पंजाबी, गढ़वाली, कुमाऊंनी लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुति दी। साथ ही समूह और एकल नृत्य पेश किया।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण और कार्यक्रम आयोजक प्रो. प्रवीण सिंह बिष्ट ने कहा कि छात्र-छात्राओं के रचनात्मक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं। कुलानुशासक डॉ. डीएस बिष्ट ने कहा कि विद्यार्थी अनुशासन में रहकर परिसर का नाम ऊंचा उठाएं। निर्णायक नरेश बिष्ट, ललित पांडे, जावेद सुहेल थे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक सचिव पुनीत आर्या, प्रो. दया पंत, प्रो. इला साह, प्रो. एके नवीन, छात्रसंघ सचिव अक्षय कुमार, पूर्व सचिव आशीष पंत, मनीष तिवारी, पूरन सिंह, बहादुरसिंह, प्रेम सिंह, नंदन जड़ौत, डॉ. बलवंत आर्य, धनी आर्या, डॉ. संगीता पवार, डॉ. नीलम, डॉ. साक्षी तिवारी, डॉ. मनोज बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष अक्षित पांडे, डॉ. ज्योति आदि मौजूद थे।