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राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन की परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू

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अल्मोड़ा। राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत संचालित परियोजनाओं की चौथी मूल्यांकन कार्यशाला पर्यावरण संस्थान में ऑनलाइन शुरू हो गई है। विषय विशेषज्ञों ने मूल्यांकन के दौरान परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि सभी अनुसंधान हिमालयी राज्यों में समाजोपयोगी हों।
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विशेषज्ञों ने कहा हिमालयी भूगोल जितना जटिल है उतना ही संभावनाओं से भरा है। मूल्यांकनकर्ताओं ने समाजोन्मुखी अनुसंधानों कार्यों को प्रासंगिक बताया। बंगलूरू से वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. वीके गौड़ की अध्यक्षता में शुरू दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन पर संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने सभी विषय विशेषज्ञों से योजनाओं के ठोस मूल्यांकन का अनुरोध किया।
जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय के डॉ. एसए रोमसू, नई दिल्ली के डॉ. रोहित मगरोता, पीएसआई देहरादून के डॉ. देवाशीष सेन, सिक्किम के डॉ. घनश्याम शर्मा, सीएसआईआर रुड़की के डॉ. डीपी कानूनगो, आईआईटी रुड़की के संजय चिकरमनी ने जल संसाधन प्रबंधन और ढांचागत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे शोध कार्यों और उपलब्धियों पर प्रस्तुतिकरण दिया।
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परियोजना संचालकों ने बताया कि हिमालयी राज्यों में जल संरक्षण, जलागम क्षेत्रों के पुनर्जीवन, आपदा पूर्व चेतावनी वाले तंत्र को विकसित करने, नगरीय और कस्बाई आबादी की बसासत, सतत विकास के लक्ष्यों पर आधारित निर्माण और पुरातन निर्माण आदि के संरक्षण की दिशा में अभिनव प्रयोग किए जा रहे हैं।
द्वितीय सत्र में आजीविका विकल्प और रोजगार सृजन की दिशा में संचालित परियोजना के प्रमुखों ने अपना कार्य प्रस्तुत किया। इसमें बंगलूरू सीएसआईआर के डॉ. रमेश केवी, इनहेयर के मनोज महेश्वरी, श्रीनगर जम्मू विश्वविद्यालय के अमजद मसूद हुसैनी, त्रिपुरा कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. सुखहेन चंद्र दास, गढ़वाल उत्तराखंड से डॉ अरविंद विजलवाण, गुवाहाटी असम के डॉ. वीके भट्टाचार्या ने अपनी परियोजनाओं की प्रस्तुति दी। यहां वरिष्ठ जल वैज्ञानिक प्रो. वीके गौड़, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से प्रो. जेएस गर्ग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीसी गोयल, एनआरएससी-इसरो हैदराबाद के डॉ. आर नागराजा, पूर्व निदेशक वीपीकेएएस डॉ. जेसी भट्ट ने प्रस्तुत परियोजना कार्यों का मूल्यांकन कर अपने सुझाव दिए।
भारत सरकार वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय माउंटेन डिविजन के प्रमुख डॉ शरद सापरा, वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर की उपस्थिति में मिशन नोडल अधिकारी किरीट कुमार ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। संचालन मिशन परियोजना वैज्ञानिक डॉ. ललित गिरी ने किया। संस्थान के आशुतोष तिवारी, पुनीत सिराड़ी, अंकित ध्यानी, अशीष जोशी, अरविंद कुमार ने सहयोग दिया।
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