द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। कंटरमैन के नाम से अपनी विशेष पहचान बना चुके शिक्षक जमुना प्रसाद तिवारी ने लॉकडाउन के बीच कनस्तरों से डस्टबिन बनाने का सिलसिला जारी रखा है। राजकीय इंटर कॉलेज बटुलिया में जीव विज्ञान प्रवक्ता पद पर कार्यरत जमुना प्रसाद तिवारी राज्यपाल पुरस्कार, शैलेश मटियानी पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
शिक्षक जमुना प्रसाद तिवारी ने लॉकडाउन के समय का सदुपयोग करते हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत कनिस्तरों के डस्टबिन बनाने का काम जारी रखा। इस दौरान उन्होंने लगभग 50 कनस्तरों में रंग रोगन कर डस्टबिन के लिए तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह डस्टबिन गांव-गांव में स्थित धार्मिक स्थलों पर स्थापित किए जाएंगे।
शिक्षक जमुना प्रसाद तिवारी विगत एक दशक से पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के उद्देश्य से कनस्तरों को काटकर उनकी सफाई कर उसमें रंग रोगन कर डस्टबिन के लिए तैयार करते हैं। वह इन डस्टबिनों को अब तक विभिन्न विद्यालयों, विमांडेश्वर मंदिर, बाजार आदि स्थानों पर दे चुके हैं। इसके लिए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
इस समर्पण भाव के कार्य को देखते हुए अब कई विद्यालय भी इस अभियान को अपना रहे हैं। यही नहीं तिवारी ने अपने घर पर नर्सरी बनाकर विद्यालय के लिए भी पौधे तैयार किए हैं। वह लोगों को भी निशुल्क पौध वितरित करते हैं। तिवारी गौरैया को संरक्षित करने के लिए घोंसले भी बनाते हैं। वह खाली समय में कनस्तरों को काटने या नर्सरी में कार्य करते दिखाई देते हैं। वह राइंका बटुलिया के स्मार्ट इको क्लब प्रभारी हैं। पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल में संरक्षण शिक्षा के लिए संदर्भदाता के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।