अल्मोड़ा। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोनिवि की कुमाऊं मंडल कार्यकारिणी की शक्ति सदन में हुई बैठक में निर्माण कार्यों में प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तक्षेप पर आक्रोश जताया गया है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए इंजीनियर्स फेडरेशन का गठन किया गया है। जरूरत पड़ी तो कार्य बहिष्कार और हड़ताल पर जाने को सदस्य बाध्य होंगे।
वक्ताओं ने कहा कि शासन ने स्थानांतरण सत्र शून्य घोषित कर दिया गया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दबावों में जनहित और कार्यहित के नाम पर तबादले किए जा रहे हैं। वार्षिक तबादले एक सामान्य प्रक्रिया है और कार्मिकों का अधिकार है। शासन से मांग की गई कि भ्रष्ट तरीके से किए जा रहे तबादलों पर रोक लगे।
उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत सड़क निर्माण कार्य जल निगम, ग्रामीण अभियंत्रण, सिंचाई जैसे विभागों को दिए जा रहे हैं। जिनके पास सड़क निर्माण कार्यों की विशेषज्ञता तक नहीं है। सड़क निर्माण के कार्य लोनिवि को ही आवंटित करने की मांग की गई। इस योजना में कार्यरत लोनिवि कर्मियों को प्रतिनियुक्त भत्ता दिए जाए।
आरोप लगाया कि कि कुछ अभियंता अपने राजनीतिक आकाओं के बल पर दो-ढाई दशक में तीन-तीन प्रोन्नति लेकर लगातार एक स्थान पर ही काबिज हैं। मांग की गई कि ऐसे अभियंताओं के तत्काल तबादले हों और दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत अभियंताओं को उनके स्थान पर तैनाती दी जाए।
संचालन मंडलीय मंत्री विनोद सनवाल ने किया। बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष रमेश सिंह मेहरा, मंडल अध्यक्ष अजेंद्र जोशी, स्फोडे अध्यक्ष पीसी जोशी, उपाध्यक्ष मनोज महतोलिया, भुवन भट्ट, संजय नयाल, संजय कार्की, सतनाम सिंह के अलावा जिलाध्यक्ष और सचिव मौजूद थे।