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लोगों को मुंह चिढ़ा रही ढाई करोड़ की बिल्डिंग

Fri, 12 Aug 2016 10:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला धौलछीना (अल्मोड़ा)।
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धौलछीना का सरकारी अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। धौलछीना में 2.47 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बना दिया गया है, लेकिन भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है। बारह साल बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी में उच्चीकृत नहीं हो सका है। अस्पताल में तैनात एकमात्र डॉक्टर पिछले दो माह से मेडिकल पर गए हुए हैं। इस कारण मरीजों को उपचार को 34 किमी दूर जाना पड़ रहा है।
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भैसियाछाना ब्लॉक मुख्यालय के निकट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना को सरकार ने 2004 में उच्चीकृत करने का शासनादेश जारी किया। इसके बाद 2.47 करोड़ की लागत से सीएचसी भवन का निर्माण हुआ, परंतु अस्पताल सीएचसी में उच्चीकृत नहीं किया गया। भवन बनने के बाद दो बार भवन का मरम्मत का कार्य भी हो चुका है, किंतु अभी भी भवन की छत कई स्थानों पर टपक रही है।

अस्पताल में तैनात एकमात्र डॉक्टर पिछले दो माह से मेडिकल अवकाश पर हैं। अस्पताल में एक फार्मेसिस्ट और एक वार्ड ब्वाय तैनात है। उनके छुट्टी पर रहने पर अस्पताल बंद रहता है। स्वच्छक और चौकीदार का पद खाली होने से अस्पताल में गंदगी का अंबार लगा रहता है। तकनीशियन नहीं होने से एक्स-रे, रक्त, बलगम, यूरिन आदि की जांच नहीं हो पाती है।
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बदहाल व्यवस्थाओं के चलते महिलाओं को प्रसव कराने को 34 किमी दूर अल्मोड़ा ले जाना मजबूरी बन गया है। पीएचसी में 108 एंबुलेंस की व्यवस्था भी नहीं है। जरूरत पड़ने पर 30 किमी दूर सेराघाट से एंबुलेंस मंगानी पड़ती है। अस्पताल के लिए पेयजल लाइन नहीं बिछाई गई है। हालांकि हैंडपंप लगा है, लेकिन उसका पानी पीने योग्य नहीं है।

चहारदीवारी न होने से अस्पताल परिसर लावारिस पशुओं का अड्डा बना हुआ है। मुख्य सड़क से अस्पताल को जोड़ने वाला मार्ग बदहाल स्थिति में है। बदहाल व्यवस्थाओं के चलते धौलछीना पीएचसी मात्र नाम का ही अस्पताल रह गया है। करीब एक सप्ताह पूर्व डीएम के अलावा सीडीओ, सीएमओ अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है।
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