जिला अस्पताल की लिफ्ट करीब आठ साल से अधिक समय से खराब है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक इस लिफ्ट के स्थान पर नई लिफ्ट स्थापित नहीं कर सका है। लिफ्ट खराब रहने से मरीजों को सड़क से अस्पताल तक तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित ओपीडी और वार्डों तक पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला अस्पताल का पूर्व में पुराना भवन था। पुराने अस्पताल भवन के स्थान पर नया बनाने के लिए 12 जनवरी 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने शिलान्यास किया। करीब चार साल बाद भवन बनकर तैयार हुआ। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने 16 मार्च 2008 को अस्पताल भवन का लोकार्पण किया। तब इसमें मालरोड से अस्पताल के ओपीडी और वार्डों तक मरीजों को पहुंचाने के लिए लिफ्ट भी लगाई गई थी, लेकिन यह लिफ्ट कुछ ही समय बाद खराब हो गई। करीब आठ साल बीत गए। मरीजों को लिफ्ट सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा।
लिफ्ट के अल्प अवधि में खराब होने पर तत्कालीन प्रमुख चित्किसा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कार्यदायी संस्था और ठेकेदार के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने संबंधित ठेकेदार और कंपनी के खिलाफ 31अक्तूबर 2012 को थाने में भी तहरीर दी, लेकिन लिफ्ट ठीक नहीं हुई।
इस वर्ष के शुरुआत में शासन ने नई लिफ्ट लगाने के लिए 31.66 लाख और जिला अस्पताल प्रबंधन समिति के कोष से 3.04 लाख रुपए मंजूर किए गए, लेकिन अब तक नहीं लिफ्ट नहीं लग सकी है। सड़क से जिला अस्पताल लगा है। अस्पताल भवन के ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए संकरी सीढ़ियां बनी हुई हैं। अस्पताल की तीन और चार मंजिल पर ओपीडी और वार्डों में गंभीर रोगियों को लाने-ले जाने के लिए तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।