अल्मोड़ा। शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों का नाम मिटाने के प्रकरण ने एसएसजे विश्वविद्यालय में स्मैक के अड्डे की पोल खोल दी। विश्वविद्यालय में हुए बवाल के बीच कॉलेज प्रशासन ने छात्रसंघ भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन में स्मैक के अड्डे होने के कई सुबूत मिले, जिससे आशंका जताई जा रही है कि कक्ष का उपयोग स्मैक पीने के लिए किया गया है। कॉलेज में नशाखोरी की आशंका पर कॉलेज प्रशासन और छात्र भौचक्के रह गए। सूचना पर पुलिस ने भी निरीक्षण किया। कॉलेज प्रशासन दो दिन के भीतर कमेटी बैठाकर आगे की कार्रवाई करेगा।
छात्रसंघ पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर इन दिनों एसएसजे विश्वविद्यालय में मामला गरमाया है। पिछले दिनों एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने निदेशक प्रो. जगत सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंपकर छात्रसंघ कार्यकारिणी भंग करने की मांग उठाई थी। उन्होंने शिलापट से छात्रसंघ पदाधिकारियों का नाम भी मिटाया था।
इधर, सोमवार को कार्यकारिणी भंग करने की मांग को लेकर एक बार फिर एनएसयूआई कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे। डीएसडब्ल्यू जया उप्रेती से मिलने के बाद उन्होंने कार्यकारिणी को लेकर कई सवाल उठाए। इस दौरान पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील कठायत और पूर्व महासचिव आशीष पंत ने कहा कि छात्रसंघ भवन में कई बार चोरी हो चुकी है। भवन की देखरेख तक नहीं हो पा रही है। इस पर निदेशक प्रो. जगत सिंह बिष्ट समेत कॉलेज प्रशासन और छात्रों ने भवन का निरीक्षण किया। भवन में कुछ ऐसी सामग्री मिली, जिससे वहां स्मैक का इस्तेमाल करने की आशंका जताई जा रही है। बताया गया कि भवन में स्मैक सेवन में प्रयोग की जाने वाली सिल्वर फॉयल, दस रुपये का एक नोट समेत अन्य नशे की सामग्री मिली है। सामग्री मिलने पर छात्रों समेत कॉलेज प्रशासन के होश उड़ गए। भवन के बाहर भी ऐसी सामग्री मिली, जिससे वहां स्मैक पीने की आशंका व्यक्त की जा रही है। डीएसडब्ल्यू ने भी सामग्री की फोटो और वीडियो बनाई। इसके बाद कॉलेज प्रशासन की सूचना पर एसआई सौरभ भारती ने मौके पर पहुंच निरीक्षण किया। इसके बाद भवन बंद कर चाभी निदेशक को सौंप दी गई। अब मामले में दो दिनों बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से कमेटी बैठाई जाएगी, जिसके बाद कार्रवाई होगी।
कार्यकारिणी भंग करने को लेकर एनएसयूआई में रोष
अल्मोड़ा। कार्यकारिणी भंग किए जाने की मांग को लेकर अब भी एनएसयूआई कार्यकर्ताओं में रोष है। सोमवार को परिसर निदेशक से मुलाकात कर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने भारी रोष जताया। छात्रसंघ को मिले मिठाई आदि के पैसों पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। निदेशक के साथ छात्रों की झड़प भी हुई। छात्रों ने लिंगदोह के मुताबिक पदाधिकारियों का कार्यकाल शीघ्र समाप्त करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि छात्रसंघ को मिठाई के नाम पर 1.53 लाख रुपये मिले। इतनी बड़ी रकम क्यूं दी गई। इस दौरान डीएसडब्ल्यू से छात्र नेताओं की कहासुनी भी हुई। निदेशक से भी काफी बहस हुई।
महासचिव का नाम शिलापट से हटाने पर नाराजगी
अल्मोड़ा। एसएसजे विवि अल्मोड़ा के छात्रसंघ भवन में अराजक तत्वों ने 2018-19 में पूर्व महासचिव अक्षय कुमार टम्टा का नाम ही शिलापट से हटा दिया, जिस पर पूर्व छात्रसंघ ने कड़ी नाराजगी जताई। सोमवार सुबह कॉलेज प्रशासन और छात्र कक्ष में पहुंचे। कक्ष की चाबी न मिल पाने पर छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के सामने भवन का ताला तोड़ा। जिसके बाद कॉलेज प्रशासन और छात्रों ने अंदर प्रवेश किया। कक्ष में 2018-19 के पूर्व छात्रसंघ महासचिव अक्षय कुमार टम्टा का शिलापट से नाम मिटा देख छात्र भड़क गए। छात्रों ने कहा कि शिलापट में अन्य वर्षों के सभी छात्रसंघ पदाधिकारियों का नाम है, लेकिन सिर्फ एक छात्र का नाम शिलापट से हटा है। पूर्व महासचिव ने मामले को लेकर निदेशक को लिखित पत्र देकर मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जिले में स्मैक के मामले में बड़े गिरोह की नहीं हुई गिरफ्तारी
अल्मोड़ा। इस साल स्मैक की तस्करी में सिर्फ तीन ही आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। लोगों का मानना है कि जिले में लोग स्मैक का उपयोग कर रहे हैं। इनमें बड़े गिरोह भी सक्रिय हो सकते हैं। तीन माह पूर्व हल्द्वानी में अल्मोड़ा जिले के तीन लोग स्मैक की तस्करी में पकड़े गए थे। लगातार बढ़ रही नशाखोरी के बीच जिले में पुलिस को कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लग पाई है। जिले में कुल 35 ग्राम ही स्मैक पकड़ी गई है, जबकि लोगों का यह भी कहना है कि कई युवा अब बेखौफ बाजारों समेत अन्य स्थानों में स्मैक ले रहे हैं।
परिसर निदेशक ने की त्यागपत्र की पेशकश
अल्मोड़ा। सोमवार को छात्रसंघ भवन में स्मैक के इस्तेमाल की सामग्री मिलने से कॉलेज प्रशासन भी आहत हुआ है। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने कार्यमुक्त करने की पेशकश की है। निदेशक प्रो. बिष्ट ने कहा कि इन दिनों कॉलेज लगातार विवादों में घिर रहा है। विवादों के बीच स्मैक प्रकरण से वह आहत हुए हैं। सोमवार को विवादों के बीच उन्होंने विश्वविद्यालय कुलपति को त्यागपत्र लिख दिया। हालांकि छात्रों के आग्रह के बाद उस बीच वह शांत हो गए। निदेशक प्रो. बिष्ट ने कहा कि वह कुलपति से कार्यमुक्त करने की पेशकश करेंगे।
नियमानुसार तो सिर्फ तीन लोगों के पास रहती है चाबी
अल्मोड़ा। नियमानुसार छात्रसंघ कक्ष की चाबी सिर्फ तीन लोगों के पास रहनी चाहिए। विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इसमें छात्रसंघ अध्यक्ष, छात्रसंघ महासचिव और डीएसडब्ल्यू के पास ही भवन की चाबी होती है। बताया जा रहा है कि यह चाबी सिर्फ छात्रसंघ अध्यक्ष और महासचिव के पास ही है। डीएसडब्ल्यू के नई तैनाती पर उन्हें यह चाबी नहीं मिल पाई है।
छात्रसंघ पदाधिकारियों में भी रोष
अल्मोड़ा। वर्तमान छात्रसंघ पदाधिकारियों के नाम शिलापट से मिटाने के मामले में पदाधिकारियों में रोष है। सोमवार को पदाधिकारियों ने एक बार फिर परिसर निदेशक को ज्ञापन सौंप दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छात्रसंघ महासचिव नवीन कनवाल ने कहा कि बीते दिन छात्रसंघ पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंप उनके नाम शिलापट से मिटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। इससे बाद उनके खिलाफ एफआईआर नहीं की गई है। छात्रों ने शीघ्र मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस मौके पर छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक उप्रेती, सचिव नवीन कनवाल, कोषाध्यक्ष राहुल अधिकारी, उपाध्यक्ष अरविंद बोरा, छात्रा उपाध्यक्ष मेघा डसीला, कोषाध्यक्ष राहुल अधिकारी आदि रहे।
प्रकरण पूरी तरह बनावटी है, एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं की प्लानिंग है। अराजकता फैलाई जा रही है। ताला तोड़ना था तो पदाधिकारियों को बुलवाना चाहिए था। हमें बिना बनाए आज भी छात्रसंघ भवन का ताला तोड़ दिया गया। छात्रसंघ की छवि को धूमिल किया जा रहा है।
-दीपक उप्रेती, छात्रसंघ अध्यक्ष।
एनएसयूआई ने कृत्य किया है, यदि ऐसा प्रकरण आया है तो मामले की जांच होनी चाहिए। छात्रसंघ के पदाधिकारी जहां भी जरूरत होगी वह अपना पक्ष रखेंगे।
-नवीन कनवाल, छात्रसंघ महासचिव।
छात्रसंघ भवन की चाबी अध्यक्ष के पास रहती है। वहां अन्य कोई बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकता है। छात्रसंघ अध्यक्ष जिस तरह एनएसयूआई पर कृत्य का आरोप लगा रहे हैं वह पूरी तरह बेबुनियाद है। छात्रसंघ अध्यक्ष नशे का माहौल बना रहे हैं।
-पवन मेहरा, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष।
कॉलेज में स्मैक प्रकरण को लेकर कमेटी बैठाई जाएगी। जिसके बाद मामले की जांच होगी। इन दिनों हो रहे विवादों में भी सभी पक्षों को सुना जाएगा।
-प्रो. जगत बिष्ट, निदेशके एसएसजे विवि अल्मोड़ा।