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देश के बड़े भौतिक विज्ञानियों में अमित छाप छोड़ी डा. पंत ने: पद्मश्री पाठक

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मंचासीन पद्मश्री शेखर पाठक, डा. बटरोही तथा अन्य अतिथिगण। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे डॉ. डीडी पंत के जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रंखला में शनिवार को जीआईसी सभागार में आयोजित सभागार में पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक ने कहा कि डॉ. पंत न केवल कुविवि के प्रथम कुलपति रहे बल्कि उन्होंने देश के बड़े भौतिक विज्ञानियों में भी अमिट छाप छोड़ी। बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा तो है लेकिन रोजगार नहीं है।
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डॉ. डीडी पंत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इंटर के बाद 1936 तक वह अल्मोड़ा में स्वतंत्रता आंदोलन की ताप को महसूस करने लगे थे। फिर वह पढ़ाई के लिए बनारस चले गए। बीएससी, एमएससी में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के बाद डॉ. राधाकृष्णन ने उन्हें चंद्रशेखर रमन के पास बंगलूरू भेजा। जहां उन्होंने प्रकाश पर पीएचडी भी की। उन्होंने बताया कि बाद वह आगरा विवि में प्रोफेसर भी बने। डॉ. लक्ष्मण सिंह बटरोही ने कहा कि डॉ. पंत का विज्ञान के अलावा भी अन्य क्षेत्रों में योगदान था। वह विज्ञान में सामान्य हिंदी के बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करते थे।
1965 में उन्हें हिंदी, अंग्रेजी में गांधी पर पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी दी गई और इसे देशभर में सराहना मिली। पत्रकार राजीव लोचन साह ने कहा कि डॉ. पंत की पढ़ाने की शैली उत्कृष्ट थी। पूर्व वनाधिकारी जीवन सिंह मेहता, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी विचार रखे। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने डॉ. लक्ष्मण बटरोही, आनंद सिंह बगडवाल ने राजीव लोचन साह और बार एसोसिएशन अध्यक्ष महेश परिहार ने पद्मश्री शेखर पाठक और थ्रीष कपूर ने जीबी पंत संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल को सम्मानित किया। अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पाठक ने सभी का स्वागत किया।
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जीआईसी और नगर पालिका की ओर से आयोजित कार्यक्रम का संयोजन नवीन पाठक ने किया। समारोह में जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक एचबी चंद्र, हयात रावत, एके अरुण, पूरन चंद्र तिवारी, पीसी तिवारी, डीएस रावत, उदय किरौला, दयाकृष्ण कांडपाल, हरीश पंत, वसुधा पंत, डॉ. गोविंद सिंह रावत, दीपक पांडे, निर्मल पंत, नंदा वल्लभ पांडे, डॉ. राजेंद्र रावत, ललित मोहन जलाल समेत विभिन्न स्कूलों के बच्चे और शिक्षक मौजूद रहे।
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