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डाक्टर, स्वास्थ्य कर्मी होते तो घायलों की बच सकती थी जान

Fri, 05 May 2017 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
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 भौनखाल-तड़म मार्ग पर 16 मार्च की शाम बोलेरो दुर्घटना के घायलों को यदि राजकीय अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भौनखाल में उपचार मिल जाता तो कई घायलों की जान बच सकती थी। उपजिला मजिस्ट्रेट सल्ट (खुमाड़) गोपाल राम बिनवाल द्वारा की गई मजिस्ट्रीयल जांच में इसका खुलासा हुआ है। उप जिला मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को भेज दी है। इस मामले में दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।      
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मालूम हो कि 16 मार्च की शाम भौनखाल से तड़म जा रही बोलरो संख्या यूके-01-सीए-543 सायं 7:15 बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना में आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि नौ यात्री गंभीर और सात व्यक्ति आंशिक रूप से घायल थे। घटनास्थल से दो सौ मीटर दूरी पर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भौनखाल में कोई डाक्टर, स्वास्थ्य कर्मी नहीं थे और अस्पताल बंद था। जिससे घायलों को उपचार नहीं मिल पाया था। लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी।      
डीएम ने मामले की जांच उप जिला मजिस्ट्रेट सल्ट को सौंपी थी।

जांच में उपजिला मजिस्ट्रेट ने पाया कि अस्पताल में दुर्घटना के उपरांत डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मी नहीं थे। जिससे घायलों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया। यदि घायलों को स्थानीय अस्पताल में उपचार मिलता तो कई की जानें बच सकती थीं। सभी घायलों को 108 एंबुलेंस और निजी वाहनों से रामनगर अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायलों को रामनगर से सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी, राजकीय अस्पताल काशीपुर और निजी अस्पतालों में ले जाया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटना के संबंध में किसी के द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। वाहन चालक/स्वामी लक्ष्मण सिंह द्वारा घायलावस्था में दुर्घटना के संबंध में ड्राइविंग लाइसेंस का गुम होना बताया गया है। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। इधर जिलाधिकारी सविन बंसल का कहना है कि मामले में गलती पाए जाने पर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।      
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