शहर से लगी 13 ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने से क्षेत्र के लोग भड़क गए हैं। इन गांवों के ग्रामीणों ने मंगलवार को शहर में जुलूस निकालाकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्तारीकरण से पूर्व 23 ग्राम पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव था, लेकिन दस ग्राम सभाओं को छोड़कर 13 ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल किया गया है, जो कि अन्यायपूर्ण है। ग्रामीणों ने इस संबंध में जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
ग्रामीणों ने मालरोड होते हुए शहर के मुख्य बाजारों से नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। ग्रामीण पालिका और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि विस्तारीकरण से पहले 23 ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने का प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया था, लेकिन पालिका के विस्तारीकरण में 10 ग्राम पंचायतों को हटा दिया गया और दूर की 13 ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने से छोड़ा गया है वह गांव पालिका से सटे हैं, जबकि राजनीतिक द्वेष भावना से दस ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया गया है और 13 ग्राम पंचायतों को परिसीमन में पालिका में शामिल गया गया है जो कि डेढ़ से दो किमी दूरी पर हैं। शामिल की गई अधिकांश ग्राम पंचायतों की जनसंख्या और क्षेत्रफल न्यून है। इन गांवों में गरीब जनता निवास करती है जो कि पालिका के देयकों का भुगतान करने में समर्थ नहीं होगी।
चेतावनी दी कि यदि सराकर ने फैसला वापस नहीं लिया तो जनांदोलन तेज किया जागा। प्रदर्शन में हवालबाग के ज्येष्ठ उप प्रमुख महेश चंद्र, मोहन सिंह खाती, देवीदत्त लखचौरा, डीआर आर्य, आनंद लटवाल, राजेश जोशी, हर्ष कनवाल, कांग्रेस नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला, आनंद सिंह ऐरी, हंसा देवी, ममता, चंद्रा, प्रेमा, सरस्वती, नंदा, सरोज स्यालाकोटी, गीता जोशी, चंद्रा देवी, कमला देवी, कृष्ण सिंह बिष्ट, कैलाश पांडे, बीएस राणा, गिरीश बिष्ट, प्रमोद आर्या समेत काफी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।