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डीएम ने सीएस को भेजी जांच रिपोर्ट, असाध्य रोग से हुई किशोरी की मौत

Tue, 18 Apr 2017 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 चौखुटिया तहसील के अंतर्गत खजुरानी गांव में किशोरी की मौत मामले की जांच रिपोर्ट एसडीएम ने जिलाधिकारी सविन बंसल को सौंप दी है। एसडीएम गौरव चटवाल की रिपोर्ट के अनुसार किशोरी की मौत असाध्य रोग के कारण हुई, भूख से नहीं। वह बीमारी के चलते कई माह से बिस्तर पर थी। परिवार के किसी अन्य सदस्य में भी कुपोषण के लक्षण नहीं पाए गए। जिलाधिकारी ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी है।
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डीएम सविन बंसल की ओर से मुख्य सचिव को भेजी गई रिपोर्ट में उल्लेख है कि 24 मार्च को खजुरानी में लगे शिविर में मृतका सरिता के परिजनों ने इस संबंध में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। सरिता की मां जानकी ने विधवा पेंशन न मिलने और दोनों बेटों को विकलांग पेंशन न मिलने की शिकायत जरूर दर्ज कराई थी। इस बारे में समाज कल्याम अधिकारी को निर्देशित किया गया था। एसडीएम की रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि परिवार की मुखिया जानकी को गांव की दुकान से दस अप्रैल को ही राशन दिया गया था, जबकि सरिता की मौत उसके पांच दिन बाद पंद्रह अप्रैल को हुई है। महज पांच दिन में पैंतीस किलो राशन खत्म होने का सवाल नहीं है। सरिता की मौत के बाद हुई डाक्टरी जांच में भी मृतका के परिवार के किसी भी सदस्य में भुखमरी और कुपोषण के लक्षण नहीं पाए गए। खजुरानी गांव में भूख से मौत की खबर मामले में उप मजिस्ट्रेट भिकियासैंण, चौखुटिया की जांच आख्या में सरिता उर्फ सरस्वती की मौत भुखमरी से नहीं बल्कि असाध्य रोग के ग्रसित होने के कारण बताई गई है।

डीएम ने बताया कि जानकी की विधवा पेंशन डाकखाने में जमा हो चुकी है और दोनों विकलांग बेटों के आवेदन की कार्यवाही एक सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए गए। डीएम के अनुसार सरिता की 15 अप्रैल को मौत के बाद परिजनों ने 16 अप्रैल को दाह संस्कार कर दिया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौखुटिया के प्रभारी डा. विवेक
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पंत ने बाद में मृतका के परिजनों और सगे संबंधियों की शारीरिक जांच की। परिवार के किसी भी सदस्य में भुखमरी या कुपोषण के लक्षण नहीं पाए गए। मृतका के अन्य परिवारजन भाई दिवान सिंह, हर सिंह, चाचा अर्जुन सिंह आनुवांशिक मानसिक रोग और शारीरिक विकृति से ग्रसित हैं और विकलांग हैं। जिलाधिकारी ने उपजिला मजिस्ट्रेट को घटना की विस्तृत जांच करके 15 दिन के अंदर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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