अल्मोड़ा। वन बीट अधिकारी वन आरक्षी संघ की बैठक में वन कर्मियों की समस्याओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रदेश में वन आरक्षी के 1400 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग उठाई। चेतावनी दी गई कि यदि वन आरक्षी से वन दरोगा के पदों पर एक मई तक पदोन्नति नहीं की गई तो रात्रि गश्त का बहिष्कार किया जाएगा।
चिंतन सभागार में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वन पंचायतों में अग्नि प्रबंधन की जिम्मेदारी वन पंचायत प्रबंधन समिति की है। इसके बावजूद वन आरक्षी और वन दरोगाओं को वन पंचायतों की देखरेख करनी पड़ रही है। अधिकतर वन पचायतों का कार्यकाल पूरा होने पर भी नए चुनाव नहीं कराए गए। वन पंचायतों में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण देने के प्राविधान का पालन नहीं किया जा रहा है।
पलायन के कारण पर्वतीय क्षेत्र में अधिकांश कृषि भूमि बंजर होकर चीड़ बहुल जंगल में बदल गई है। इस भूमि पर आग बुझाने की जिम्मेदारी संबंधित भू-स्वामी की है, लेकिन वन कर्मियों को आग बुझानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि विभाग में पिछले पांच साल से कर्मियों को वर्दी नहीं मिली है। फायर वाचरों के मजदूरी का भी भुगतान लंबित है। विभाग में लीसा मोहर्रिरों के पद समाप्त हो गए हैं। उनका कार्य वन आरक्षियों से करवाया जा रहा है। उन्होंने वन आरक्षियों को 2800 ग्रेड-पे मिलने तक लीसा कार्य बहिष्कार का ऐलान किया गया।
बागेश्वर वन प्रभाग में वन आरक्षियों के किए गए निलंबन को वापस लेने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि विभाग में वन दरोगा के 450 और उपराजि के 150 पद भी रिक्त हैं। रिक्त पदों को तत्काल भरने, वन आरक्षियों के सरकारी आवासों की मरम्मत करने की मांग की। बैठक की अध्यक्षता हीरा सिंह बिष्ट और संचालन बलवंत सिंह भंडारी ने किया। बैठक में वृत्त अध्यक्ष भगवती प्रसाद जोशी, कृष्णानंद भट्ट, राजेंद्र कुमार पांडे, भीम सिंह बोरा, मनोज कुमार बिष्ट, शंकर शिंह बिष्ट, हरीश सिंह बिष्ट, सावित्री बगेड़ा, जगदीश कांडपाल, संजय सिंह रावत, किरन तिवारी आदि ने भाग लिया।