बीडीसी बैठक में डीएम रंजना समेत अन्य अधिकारियों की अनुपस्थिति से गुस्साए ग्राम प्रधान सभा कक्ष में जाए बिना ही बैठक का बहिष्कार कर चले गए। बाद में पहुंचे विधायक महेश नेगी ने अधिकारियों की बैठक ली। विधायक ने अधिकारियों से पंचायत प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बनाकर विकास कार्यों में तेजी लाने को कहा।
ग्राम प्रधान सहित अधिकांश पंचायत प्रतिनिधियों के बहिष्कार के चलते शुक्रवार को यहां प्रस्तावित क्षेत्र पंचायत समिति की बैठक नहीं हो सकी। गुस्साए प्रधानों और अन्य सदस्यों ने जिला स्तरीय सक्षम अधिकारियों की अनुपस्थिति के मुद्दे पर बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रधान संगठन के अध्यक्ष मोहन सिंह का कहना था कि जब सक्षम अधिकारी ही नही हैं तो बैठक में भाग लेने का क्या औचित्य।
कतिपय सदस्य गत दिनों आंदोलन के दौरान हुए समझौते पर अमल न होने से भी नाराज दिखे। बहिष्कार को टालने के लिए ब्लॉक प्रमुख बिशन राम और बीडीओ बृजमोहन गुरुरानी ने भी कोशिश की, लेकिन सदस्य नहीं माने। बहिष्कार करने वालों में जिपं सदस्य गजेंद्र नेगी व शिव कुमार, प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष मोहन सिंह, दयाल मेहरा, दान सिंह कुमयां, मनोहर सिंह, भरत बिष्ट, हीरा सिंह थापा, जीवन नेगी बालम सिंह, खुशाल सिंह, शंकर सिंह, राजेंद्र सिंह, योगेश पांडे आदि पंचायत सदस्य शामिल थे।
बीडीसी बैठक के बहिष्कार के बाद पहुंचे विधायक महेश नेगी ने अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में प्रभारी सीडीओ एवं डीडीओ मोहम्मद असलम ने मनरेगा के कार्यों में चौखुटिया ब्लॉक के पिछड़ने पर अफसोस जताया। बैठक में ब्लाक प्रमुख बिशन राम, बीडीओ बृजमोहन गुरुरानी, ज्येष्ठ प्रमुख हरीश कैड़ा, कनिष्ठ प्रमुख ललिता बिष्ट, विधायक प्रतिनिधि सदानंद पांडे आदि थे। इस मौके पर कई लोगों ने विधायक महेश नेगी को ज्ञापन सौंपे।
एक वजह यह भी रही बहिष्कार की
नव निर्मित ब्लॉक कार्यालय एवं सभा कक्ष का उद्घाटन विधायक महेश नेगी द्वारा किया जाना था। लेकिन वे 12 बजे तक भी नही पहुंच पाए थे। इसके चलते 11 बजे से निर्धारित बीडीसी बैठक शुरू होने में विलंब हो रही थी। मामले में जिपं सदस्य गजेंद्र सिंह नेगी ने इस पर रोष जताते हुए बैठक का ही बहिष्कार कर दिया।
प्रधान जीवन नेगी आदि ने भी भवन के दोबारा उद्घाटन एवं इसके लिए बैठक शुरू न करने पर विरोध जताया। वहीं, विधायक महेश नेगी ने बताया कि उन्हें ब्लॉक कार्यालय भवन के उद्घाटन आदि की कोई जानकारी नहीं थी। कहा कि बीडीसी बैठक के दिन उद्घाटन कराने एवं इसके चक्कर में बैठक में विलंब कराने का कोई औचित्य नहीं था।