इन्हेयर सभागार चिनौनी में मध्य हिमालय क्षेत्र में कृषि का भावी स्वरूप पर कार्यशाला हुई। इसमें वैश्विक स्तर से बन रही कृषि नीतियों के चलते पैदा हो रही दिक्कतों पर चर्चा हुई। कहा गया कि इसके निर्धारण में वास्तविक किसानों की भूमिका नगण्य होने से इसका लाभ जमीन स्तर पर नहीं मिल पा रहा है।
कृषि अनुसंधान वैश्विक मंच (जीटीएआर), एशियन कृषक संगठन (एएफए) द्वारा प्रायोजित, इन्हेयर संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के मुख्य वक्ता इन्हेयर के संस्थापक भरत बिष्ट थे। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बन रही कृषि नीतियों के चलते पैदा होने वाली परेशानी पर चर्चा की। कहा कि बदलती प्रतिकूल प्राकृतिक परिस्थितियों में किसानों के लिए खेती अलाभप्रद, बोझ बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में कृषि को प्रभावित करने वाले किसानों को चिन्हित किया जा रहा है। ताकि उनके सुझाव भविष्य में कृषि निर्धारण नीति में कारगर सिद्ध हो सके। गोष्ठी में पहुंचे कृषकों ने अपने अनुभवों को साझा कर जमीनी परेशानियों के बारे में बताया।
वहां इन्हेयर के अध्यक्ष गिरीश पंत, सोनाली बिष्ट, मनोज माहेश्वरी, नीलम जोशी, इंदर सिंह बिष्ट, ब्लाक प्रमुख बिशन राम, जिपंस शिवकुमार, कृषक गोपाल सिंह, हीराबल्लभ सती, खष्टी अधिकारी, गोपाल दत्त, देव सिंह, देवी सिंह, मुन्नी देवी, पुष्पलता फुलोरिया, प्रकाश पंत, नवीन चमकनी, ममता देवी, राम बहादुर, राम सिंह, प्रेम सिंह, नंदन सिंह, बालम सिंह, गिरीश चंद्र आदि ने विचार रखे।