उद्यान निदेशालय के नए निदेशक आरसी श्रीवास्तव
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उद्यान निदेशालय के नए निदेशक आरसी श्रीवास्तव ने कार्यभार संभाल लिया है। निदेशक बनने के बाद चौबटिया पहुंचे श्रीवास्तव ने यहां मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक ली और उद्यान की स्थिति का जायजा लिया। बाद में वार्ता में उन्होंने कहा कि वह भी नियमित रूप से निदेशालय में नहीं बैठ पाएंगे, अलबत्ता उद्यान निदेशालय को उसका अतीत लौटाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। 15 से 20 दिन के अंदर काफी सकारात्मक परिवर्तन आ जाएगा।
चौबटिया में पृथक उद्यान निदेशालय की स्थापना 1952 में स्व. पं. गोविंद बल्लभ पंत ने की थी, इसके पीछे धारणा यही थी कि पहाड़ के काश्तकारों को उद्यानीकरण का लाभ दिया जाए। निदेशालय में अधिकारी कर्मचारियों की लंबी चौड़ी फौज खड़ी की गई। निदेशक भी यहां नियमित रूप से बैठते थे।
राज्य बनने के बाद निदेशालय के दिन बहुरने की उम्मीद थी, लेकिन 2006 में विभाग ने मुनाफे के लालच में सेब के पुराने डेलीसेस सेब के पेड़ काटकर अमेरिकन प्रजाति के पौधे लगाए लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। नए निदेशक आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि वह चौबटिया उद्यान को प्रदेश का आदर्श उद्यान बनाएंगे। गार्डन को हार्ल्टी ट्यूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। किसानों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं। उनके साथ उप निदेशक उमाशंकर सिंह भी मौजूद रहे।
कई दायित्व हैं नए उद्यान निदेशक पर
नए निदेशक आरसी श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पास बागवानी विकास, नोडल आफीसर, सूक्ष्म सिंचाई, मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक का भी जिम्मा है। यह सभी योजनाएं केंद्र पोषित हैं। यहां रहकर यह सब योजनाएं संचालित नहीं हो सकती।
जंगलों में लगाए जाएंगे फलदार पेड़
उद्यान निदेशक आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि किसानों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास चल रहे हैं। वन विभाग के साथ मिलकर जंगली जानवरों को खेतों की ओर आने से रोकने के लिए जंगलों में फलदार पौध लगाए जा रहे हैं। उद्यान गार्डन में अब डेलीसेस सेब का प्लांटेशन किया जा रहा है। अखरोट, खुबानी के ब्लाक तैयार किए गए हैं।