वन संरक्षक कार्यालय के बाहर बैठक करते कर्मचारी।
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डीएफओ और कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद बृहस्पतिवार को भी खत्म नहीं हुआ। कर्मचारियों का कहना है कि वह पत्रावलियों का निस्तारण वन संरक्षक कार्यालय में ही कर रहे हैं। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि डीएफओ द्वारा गलत नीयत और प्रतिशोध की भावना से काम किया जा रहा है। इधर प्रभागीय वनाधिकारी पंकज कुमार ने प्रभागीय कार्यालयों में गैर मौजूद करीब 40 कर्मचारियों को काम पर लौटने के आशय के नोटिस तैयार कर दिए हैं।
नोटिस देने वह वन संरक्षक कार्यालय पहुंचे लेकिन उन्हें कर्मचारियों ने नोटिस प्राप्त नहीं किए। उन्होंने कहा है कि शुक्रवार को अन्य माध्यम से नोटिस भेजने का प्रयास किया जाएगा। जिसमें कर्मचारियों का निलंबन भी किया जा सकता है और इस दौरान नो वर्क नो पे का नियम भी लागू होगा।
डीएफओ ओर कर्मचारियों के बीच चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार शाम को डीएफओ पंकज कुमार कर्मचारियों को नोटिस देने के लिए पुलिस के साथ वन संरक्षक कार्यालय पहुंचे। इस दौरान वह नोटिस रिसीव करवाने की कोशिश करते दिखे लेकिन उन्हें अधिकांश कर्मचारी वहां नहीं मिले। कुछ एक कर्मचारियों ने नोटिस रिसीव करने से इंकार कर दिया। बाद में डीएफओ वन संरक्षक आईपी सिंह के पास भी पहुंचे। डीएफओ ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा कर्मचारियों को धमकाया गया है और वह पत्र रिसीव नहीं कर रहे हैं। बताया कि शुक्रवार को किसी अन्य माध्यम से नोटिस भेजने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नोटिस में दोनों प्रभागों के कर्मचारियों से 24 घंटे के भीतर अपने प्रभागों में पहुंचकर कार्य संपादित करने को कहा गया है। इसके बावजूद कर्मचारी अगर नहीं आते हैं तो राजकीय कार्य में बाधा मानते हुए कर्मचारियों के निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है। इधर वन संरक्षक द्वारा कर्मचारियों के समर्थन में उतरने की बात पर उन्होंने कहा कि वह उनके अधिकारी हैं और उनका विवेक है वह निर्णय ले सकते हैं।
दूसरी तरफ वन कर्मचारी संघर्ष समिति के संयोजक श्याम सिंह रावत ने कहा कि सरपंच संगठन द्वारा डीएफओ को ईमानदारी का सर्टिफिकेट देना दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। सह संयोजक महेंद्र कुमार वर्मा ने भी डीएफओ के आरोपों को गलत बताया। आंदोलन को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ ने भी समर्थन दिया है।
कर्मचारियों के समर्थन में आए वन संरक्षक सिंह
अल्मोड़ा। इधर उत्तरीवृत्त कुमाऊं के वन संरक्षक आईपी सिंह कर्मचारियों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि कार्यालय का समय दस से पांच है और इससे ज्यादा देर तक कर्मचारियों को नहीं बैठाया जा सकता है। लेकिन डीएफओ पंकज कुमार अपनी जिद पर अड़े हैं। जनता के 1500 मामले लंबित पड़े हैं। वन संरक्षक ने कहा कि सरकार ने मुआवजे समेत कई मदों में भुगतान भी कर दिया है लेकिन डीएफओ द्वारा इनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। डीएफओ की मन मर्जी से आफिस नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि अगर डीएफओ को घपले दिखाई दे रहे थे तो रिपोर्ट कहां है। चार दिन से कर्मचारी उनके कार्यालय में आकर काम कर रहे हैं इसके लिए डीएफओ जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि डीएफओ को हटाने की संस्तुति करते हुए उन्होंने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है।
इन दिनों पैदल हैं डीएफओ पंकज कुमार
अल्मोड़ा। डीएफओ पंकज कुमार के चालक भी इन दिनों काम पर नहीं आ रहे हैं। जिससे उन्हें या तो पैदल कार्यालय आना पड़ रहा है या फिर वह वह किसी से लिफ्ट लेकर ऑफिस आ रहे हैं। उनका कहना है कि बृहस्पतिवार को भी वह वन संरक्षक कार्यालय भी पैदल ही गए।