तहसील रानीखेत, ब्लॉक द्वाराहाट और विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर में बंटा होने के कारण मजखाली कस्बे का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। इससे जुड़े सुदूरवर्ती गांवों की हालत और भी खराब है। सरकारी तंत्र की उपेक्षा का आलम यह है कि आजादी के बाद भी इस कस्बे को विकासखंड नहीं बनाया गया है। विकासखंड की मांग को लेकर क्षेत्र के लोग अब नए सिरे से संघर्ष करने का मन बना रहे हैं।
मजखाली कस्बे से विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की दूरी 35 किमी, ब्लॉक मुख्यालय द्वाराहाट की दूरी 50 किमी और तहसील रानीखेत की दूरी 12 किमी है। सिमोली, भैंसोली गांव इन मुख्यालयों से 70 से 80 किमी की दूरी पर हैं। छोटे मोटे कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को भारी धनराशि औरसमय बर्बाद करना पड़ता है। इसी के चलते 1960 में मजखाली क्षेत्र के लोगों ने विकासखंड बनाने की मांग उठाई।
स्व. मोते सिंह और स्व. प्रताप सिंह इन आंदोलनों के सूत्रधार रहे, लेकिन सरकारी तंत्र हमेशा क्षेत्र के लोगों को छलते रहा। इसके बाद विशन सिंह, किशन सिंह के नेतृत्व में आंदोलन चले। कैप्टन भूपाल सिंह ने भी ब्लॉक के लिए संघर्ष किए। पिछले 10 वर्षों से क्षेत्र के तमाम लोग इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि द्वारसौं, कठपुड़िया, बबुरखोला, तुस्यारी, मछलिया, खौड़ी, कालिका सहित 60 गांवों को मिलाकर ब्लॉक की मांग शासन-प्रशासन के नुमाइंदों तक पहुंचाई गई। ब्लॉक मुख्यालय के लिए भी ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने साथ नहीं दिया। सामाजिक कार्यकर्ता एनएस अधिकारी ने बताया कि सांसद अजय टम्टा और राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने भी पूर्व में उत्तराखंड शासन से मजखाली को ब्लॉक बनाने की संस्तुति भेजी थी।