अल्मोड़ा। बरसात के मौसम में जल जनित रोगों के बढ़ते खतरे के चलते स्वास्थ्य विभाग एक माह तक अभियान चलाकर प्राकृतिक जल स्रोतों के सैंपल लेगा। विभागीय कर्मचारियों ने लोगों से दूषित पानी पीने से बचने की अपील की है।
अभियान के तहत जिले के प्राकृतिक जल स्रोत, हैंडपंप, नलों और जल टंकियों से पानी के नमूने एकत्र किए जाएंगे। इसके बाद नमूनों की गुणवत्ता और संक्रमण की जांच की जाएगी। किसी जल स्रोत में पानी की गुणवत्ता मानकों से कम पाई जाती है तो इसकी जानकारी जल संस्थान, पेयजल निगम सहित संबंधित विभागों को दी जाएगी।
विभाग ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को सैंपलिंग की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि गंदे पानी की पहचान कर लोगों को पहले ही सतर्क जाएगा। इससे टाइफाइड, डायरिया, पेचिश और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों से बचाव करना आसान होगा। विभाग ने लोगों से बरसात के मौसम में केवल उबला और फिल्टर किया हुआ पानी पीने और जल स्रोतों के आसपास सफाई व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
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50 जल स्रोतों की हो चुकी है जांच
अब तक जिले में 50 से अधिक जल स्रोतों की जांच की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी भी बीमारी के फैलने से पहले ही रोकथाम की जा सकेगी। सैंपल लेने के साथ लोगों को जल जनित रोगों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
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कोट
जल जनित रोगों से बचाव के लिए यह अभियान बेहद जरूरी है। समय रहते पानी की गुणवत्ता की जांच कर गंभीर बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकता है। - डॉ. कमलेश जोशी, जिला सर्विलांस अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग अल्मोड़ा।