रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी घोषित नए जिलों के अस्तित्व में न आने से लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है। रानीखेत को जिला बनाए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। लोगों का कहना है कि 2011 में भाजपा सरकार की ओर से घोषित चार नए जिलों में रानीखेत भी शामिल था लेकिन गजट अधिसूचना जारी न होने से मामला अधर में लटक गया।
रानीखेत विकास समिति के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग बृहस्पतिवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए। इस दौरान तहसीलदार दीपिका आर्या के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया जिसमें रानीखेत को शीघ्र जिला घोषित करने की मांग की गई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि रानीखेत को जिला बनाने की नितांत आवश्यकता है। जिला न होने से नगर का व्यावसायिक ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है और पलायन लगातार बढ़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रानीखेत सहित चार नए जिलों की घोषणा की थी लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने भी कमेटी बनाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब दो कार्यकाल से भाजपा सत्ता में है फिर भी घोषित जिलों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। वहां डीएन बड़ोला, प्रमोद पांडे, अगस्त लाल साह, मोहन नेगी, भुवन पपने, गिरीश भगत, खजान पांडे, कुलदीप कुमार आदि मौजूद रहे।