शिल्पकार सम्मेलन का उद्घाटन करते अतिथि।
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मजखाली क्षेत्र में मूलनिवासी संघ का 85 साल बाद सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में शिल्पकार समाज की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। आंबेडकर गांवों को सुविधाओं से जोड़ने मांग उठाई गई।
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एडवोकेट डॉ. प्रमोद कुमार और विशिष्ट अतिथि वामसेफ सचिव दिनेश टम्टा ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में शिल्पकार बहुल तोक और आंबेडकर गांवों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, शिल्पकार वर्ग के मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराने समेत कई मांगे उठाई गई। इस मौके पर युवाओं में बढ़ती नशे और शराब की प्रवृति को खत्म करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
वक्ताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। शिल्पकार गुरु स्व. खुशीराम के चित्र पर भी माल्यार्पण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि 1933 में शिल्पकार गुरु स्व. खुशीराम ने मजखाली क्षेत्र से ही सम्मेलन की शुरुआत की थी। इस बार 85 साल बाद फिर से सम्मेलन की शुरुआत की गई है। इस दौरान बच्चों ने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़कर भी सुनाई। शिल्पकार समाज के पिछड़ेपन का निस्तारण करने की मांग भी जोर शोर से उठी। इस मौके पर जिलाध्यक्ष पीसी आर्य, कोषाध्यक्ष नंदन प्रसाद, नारायण राम, महेश लाल, राम लाल, चंदन दास, गोविंद राम, प्रेम कुमार आर्य, रमेश चंद्र आर्या, मनोज कुमार, हेमंत कुमार, खष्टी देवी आदि मौजूद थे।