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नौ साल से सीवर लाइन निर्माण को नहीं मिला धेला

Thu, 23 Feb 2017 10:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 सरकारें शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे जरूर करती हैं पर हकीकत में स्थिति इससे उलट है। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा को स्वच्छ बनाने का सपना अधर में लटका पड़ा है। नौ साल से सीवर लाइन निर्माण के शेष कार्य को पूरा करने के लिए एक धेला तक नहीं मिला है।
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मात्र एक चौथाई हिस्से में ही शहर में सीवर लाइन पड़ी है। पहले भाजपा और अब कांग्रेस सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया है। अब नई सत्तारूढ़ होने वाली सरकार से ही सीवर लाइन के लिए पैसा मिलने की उम्मीद है।
अल्मोड़ा नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 70 हजार आबादी निवास करती है। चौदह साल पूर्व शहर में सीवर लाइन बिछाने को मंजूरी मिली थी। शहर को चार जोन में बांटकर सीवर लाइन बिछाई जानी थी। 2002 में 6.10 करोड़ रुपए से उत्तर प्रदेश की निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने पहले जोन में शामिल किए गए राजपुर, मकेड़ी, हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर में सीवर लाइन बिछाई और कनेक्शन दिए। द्वितीय चरण में 2005 में जल निगम सर्वे शाखा ने 8.10 करोड़ की लागत से तीसरे जोन का कार्य प्रारंभ किया। 8.10 करोड़ के सापेक्ष सरकार से 4.85 करोड़ रुपए जारी हुए। इसके पश्चात तृतीय जोन में साईं बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानीखोला, पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, चंपानौला, खोल्टा मुहल्लों में लाइन बिछाई, परंतु 2007 के बाद से सीवर लाइन के लिए पैसा नहीं मिला है। 
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इस कारण तीसरे जोन के शेष हिस्से थपलिया, जोशीखोला समेत अन्य मुहल्लों में लाइन डालने, रोडवेज के पास पंप हाउस और पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का लंबित पड़ा है। साथ ही दूसरे और चौथे जोन का कार्य लंबित पड़ा है। सीवर लाइन के अभाव में कई लोग घरों की गंदगी नालियों में बहाते हैं। 
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