जंगली सुअरों के आतंक से ग्रामीण और काश्तकार काफी परेशान हैं। जिले का शायद ही ऐसा कोई गांव बचा हो जहां जंगली सुअरों ने किसानों की फसल को नहीं रौंदा हो। करीब डेढ़ साल पहले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रभावित गांवों में सुअर रोधी दीवार बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वन विभाग को प्रदेश सरकार की ओर से बजट नहीं मिल सका। लगातार खेती को हो रहे नुकसान के कारण कई गांवों में काश्तकारों ने खेती का कार्य ही छोड़ दिया है।
पर्वतीय इलाकों में पिछले कई सालों से जंगली सुअरों के आतंक से लोग परेशान हैं। लोग काफी मेहनत करके फसल उगाते हैं, लेकिन किसानों की मेहनत को जंगली सुअर रौंद देते हैं। मालूम हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसानों की आजीविका खेती पर ही निर्भर रहती है। सुअरों के कारण किसानों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
वन विभाग किसानों की खेती बचाने के लिए कोई योजना तो नहीं बना सका अलबत्ता 2015 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रभावित गांवों में सुअर रोधी दीवार का बनाने की घोषणा जरूर की थी लेकिन इसके लिए बजट का प्राविधान नहीं किया गया। करीब डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया है वन विभाग को इसके लिए बजट नहीं मिल पाया है। प्रभागीय वनाधिकारी एसआर प्रजापति ने बताया कि वन विभाग को सुअर रोधी दीवार के निर्माण के लिए किसी प्रकार का बजट नहीं मिला है।