वन आरक्षी, वन वीट अधिकारी संघ अल्मोड़ा वन प्रभाग की बैठक में वक्ताओं ने लीसा कार्य वन आरक्षियों को सौंपने का विरोध किया।। उन्होंने अन्य विभागीय कार्यों की
व्यस्तता के कारण लीसा सीजन में लीसा कार्य की देखरेख के लिए एक लीसा श्रमिक की अनिवार्य रूप से तैनाती करने की मांग की। बैठक में श्रमिक की तैनाती के बगैर लीसा कार्य नहीं करने का निर्णय लिया गया।
चिंतन सभागार में हुई बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि फील्ड में वन आरक्षियों की कमी बनी हुई है। एक वन आरक्षी के पास दो से चार बीटों का चार्ज होने के कारण वनों की अग्नि से सुरक्षा के लिए प्रत्येक बीट में अग्नि काल के दौरान कम से कम दो फायर वाचरों की नियमित तैनाती की जाए। फायर वाचरों को अग्निकाल में लगातार चार माह तक तैनात किया जाना चाहिए। वन आरक्षियों को विगत पांच सालों से वर्दी आदि न दिए जाने पर नाराजगी जताई। हर साल वर्दी देने की मांग की।
उन्होंने चार साल बाद भी वन आरक्षियों का नियमितीकरण नहीं होने पर नाराजगी जताई और कहा कि फील्ड में वन आरक्षियों के निवास के लिए बनी चौकियां जीर्ण शीर्ण हालत में है। उन्होंने कहा कि फील्ड में स्टाफ की कमी बनी हुई है। इस कारण वन आरक्षियों पर दबाव बढ़ा है। वन आरक्षियों के पदों पर नई नियुक्ति करने की मांग की। रामनगर में वीट वाचर की खनन माफियाओं द्वारा की गई हत्या पर रोष जताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। संघ के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में महामंत्री बलवंत भंडारी, उपाध्यक्ष इंद्रा मर्तोलिया, किरन तिवारी, गीता गोस्वामी, चंद्रावती आर्या, सावित्री बेगड़ा, हरीश बिष्ट, गोकुल नेगी, मनोज बिष्ट, संजय रावत, जगदीश चंद्र, ललित मोहन, दीवान राम, किशोर चंद्र, कुबेर आर्या, धीरेंद्र सनवाल, राकेश चंद्र आदि मौजूद थे।