जन्म के बाद कुछ समय के लिए ही पिता की गोद हो पाई नसीब
नवजात अपने पिता अंकित की गोद में किलकारी मार रहा था। बेस अस्पताल से हल्द्वानी ले जाते वक्त नवजात ने आंखें खोलकर पिता की तरफ देखा। इससे पिता का खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। बकौल अंकित आर्या बेस अस्पताल से रेफर करने के बाद नवजात को हल्द्वानी ले जा रहे थे। भीमताल में जब ऑक्सीजन बंद देखी तो इसे बदला गया। सिलिंडर बदलने में ही आधा घंटा लग गया। भीमताल के बाद नवजात की गतिविधि शून्य हो गई थी। उन्होंने कहा कि बदहाल व्यवस्था ने उनके नवजात की जान ले ली। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए ताकि फिर किसी नवजात की जान न जाए। इधर अस्पताल में भर्ती मां बेटे के स्वास्थ्य लाभ का इंतजार करते रही।
व्यवस्थाएं दुरुस्त होती तो बच जाती जान
अंकित आर्या ने कहा कि बेस अस्पताल में एनआईसीयू वार्ड फुल रहने से नवजात की जान पर बन आई। डॉक्टर ने उनसे कहा कि यदि वह आधे घंटे पहले आते तो वार्ड मिल सकता था। एनआईसीयू के लिए उन्होंने शहर के निजी अस्पतालों के भी चक्कर काटे लेकिन सुविधा न मिलने से मजबूरी में हल्द्वानी ले जाना पड़ा। यदि जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त होती और संसाधन होते तो उनके नवजात की जान बच जाती।
मामला संज्ञान में आया है। हालांकि परिजनों की ओर से अभी इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली। यदि शिकायत मिली तो मामले की जांच की जाएगी।
डा. आरसी पंत, सीएमओ अल्मोड़ा।