नंदादेवी को पुराणों में हिमालय की पुत्री कहा गया है। जिनका विवाह शिव से होता है। देवी भागवत में नंदा को शैलपुत्री के रूप में नौ दुर्गाओं में एक बताया गया है, जबकि भविष्य पुराण में उन्हें सीधे तौर पर दुर्गा कहा गया है। नंदादेवी के नाम से हिमालय की अनेक चोटियां हैं। इनमें नंदादेवी, नंदाकोट, नंदाघुंटी, नंदाखाट आदि चोटियां हैं। नंदाकिनी, नंदकेसरी आदि नदियों के नाम भी नंदा देवी के नाम से हैं। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री, उमा, गौरी, पार्वती के रूप में माना जाता है।
ब्रह्मांड पुराण में उनको तारा नाम महाशक्ति कहा गया है। मातृशक्ति के रूप में उन्हें तारांबा नाम दिया गया है। उन्हें समुद्र की देवी माना जाता है जो जल की गति को नियंत्रित करती है और समुद्र में नाविकों का मार्गदर्शन करती है। उनका श्याम वर्ण है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार तारा को उग्र तारा कहा जाता है। कत्यूरी, चंद, गढ़वाल केनरेश मां नंदा को कुल देवी के रूप में पूजते रहे। नंदा गढ़वाल, चंद राजाओं के राजकुल की बहन बेटी के रूप में भी मानी जाती थी। नंदादेवी की पूजा समूचे उत्तराखंड में होती है। उन्हें उत्तराखंड की देवी मां का दर्जा प्राप्त है।