विद्युत निगम ने उपभोक्ता को खपत से अधिक का बिल थमा दिया। शिकायत के बाद बिल को सुधारने के बजाए कनेक्शन ही काट दिया गया। उपभोक्ता की शिकायत के बाद जिला उपभोक्ता फोरम ने इसे सेवा में कमी का मामला माना है। उपभोक्ता को मानसिक क्षति पूर्ति और वाद व्यय के लिए सात हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। यह राशि जिम्मेदार कर्मचारी से वसूल की जाएगी।
आरे के पंद्रहपाली गांव निवासी बहादुर राम के अनुसार 28 जनवरी को उनके पास 15 हजार 568 रुपये का बिल भेजा गया। शिकायत करने पर इसे ठीक करने के बजाए विद्युत निगम ने कनेक्शन को ही काट दिया। इसके बाद वह जिला उपभोक्ता विवाद परितोष फोरम में गए। फोरम में विद्युत निगम के प्रतिनिधियों ने बताया कि भुगतान नहीं होने के कारण संयोजन काटा गया है, लेकिन मीटर रीडिंग से संबंधित गड़बड़ी के संबध में कोई उल्लेख नहीं किया। इसके बाद दोनों पक्षों के मध्य हुई सहमति के आधार पर उपभोक्ता ने संशोधित बिल के लिए 4303 रुपये जमा कर दिए और निगम ने कनेक्शन को जोड़ दिया। इसके बाद बहादुर राम ने फोरम में क्षति पूर्ति के लिए दावा पेश किया। फोरम के अध्यक्ष जिला जज डा. जीके शर्मा, सदस्य मीना फर्याल और संजय लोहनी ने फैसले में कहा है कि यह सेवा में कमी का मामला है। फोरम ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया है कि वह गलत बिल थमाने, उसे ठीक नहीं करने और संयोजन काटने के मामले में जिम्मेदार अधिकारी अथवा कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए उससे सात हजार रुपये वसूल कर शिकायत कर्ता को भुगतान कराएं।