रानीखेत (अल्मोड़ा)। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्या का खेती पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए यूरोपियन यूनियन ने चार देशों में अध्ययन कार्य शुरू कर दिया है। भारत में अल्मोड़ा जिले का गोविंदपुर और पश्चिम बंगाल का कलिंगपोंग क्षेत्र चयनित किए गए हैं।
इसके तहत दोनों प्रदेशों में किसानों को भ्रमण कराकर जहां जलवायु परिवर्तन के असर और इससे बचाव के बारे में बताया जा रहा है, वहीं किसान दोनों प्रदेशों की संस्कृति और परंपरा के अनुभव भी साझा कर रहे हैं। इस बार गोविंदपुर में पश्चिम बंगाल के कालिंगपोंग क्षेत्र के 15 किसान भ्रमण पर आए हैं। यह दल लोक चेतन मंच के सहयोग से तीन दिवसीय भ्रमण पर आया है।
लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार इन्वायरमेंट एंड डेवलपमेंट द्वारा संचालित स्माल होल्डर इनोवेसन फॉर रेजीलिएन्स (सीफोर) कार्यक्रम के तहत कालिंगपोंग के 15 किसानों ने लोक चेतना मंच के सहयोग से गोविंदपुर क्षे़त्र का 3 दिवसीय भ्रमण किया। उन्होंने स्थानीय किसानों के साथ मिलकर पर्वतीय क्षेत्र की परंपरागत खेती सहित संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी ली।
दार्जिलिंग क्षेत्र की संस्कृति के बारे में स्थानीय लोगों को बताया। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की रणनीति तय करने के लिए यूरोपीयन यूनियन ने सीफोर कार्यक्रम के तहत अध्ययन शुरू किया है। दोनों क्षेत्रों के किसानों के बीच बेहतर तालमेल और अनुभवों के आदान-प्रदान को लेकर भ्रमण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
मंच के कार्यक्रम अधिकारी प्रकृति मुखर्जी ने बताया कि भ्रमण कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के किसान जलवायु परिवर्तन के असर और इससे बचने के लिए खेती में किए जा रहे नये प्रयोगों की जानकारी दे रहे हैं। मंच के कालिंगपोग स्थित कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर लामा ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को एक दूसरे से सीखने का मौका मिलता है।
रानीखेत। गोविंदपुर में भ्रमण के दौरान प्रगतिशील काश्तकार दयानंद जोशी द्वारा उत्पादित मूली और उनके द्वारा कालिंगपोंग से लाकर रोपी गई बड़ी इलायची के पौधों को मेहमान किसानों ने सराहा। लोक चेतना मंच के रानीखेत स्थित कार्यालय और गोविंदपुर में किसानों का स्वागत मंच के कार्यकर्ता अभिजीत गंगोला, कुसुमलता जोशी, भुवन जोशी, चंदन सिंह आदि ने की।
रानीखेत। कालिंगपोंग के किसानों ने स्थानीय लोगों कोे सिसौण (बिच्छू घास) का सूप और तरूड़ आदि कंदमूल फलों की सब्जियां बनाकर खिलाई। कालिंगपोग के मंडुवे और फाफर की रोटियों सहित अचार आदि अन्य व्यंजन भी काफी सराहे गए।