गरुड़ के साहित्यकार मोहन चंद्र जोशी द्वारा कुमाऊंनी भाषा में लिखा गया ऋग्वेद का पहला ग्रंथ।
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गरुड़ (बागेश्वर)। साहित्यकार और कुमाऊंनी भाषा के पंडित मोहन चंद्र जोशी ने कुमाऊंनी में ऋग्वेद का पहला खंड लिखने में सफलता पाई है। इस कार्य में उन्हें तीन माह का समय लगा है।
गरुड़ के मूल निवासी मोहन चंद्र जोशी (57) की बचपन से हिंदी साहित्य में रुचि थी। वह अब तक 18 किताब लिख चुके हैं। रामचरितमानस, कामयानी, भागवत गीता के बाद ऋग्वेद का पहला खंड कुमाऊंनी में लिखा है। उन्होंने बताया कि अब ऋग्वेद का दूसरा खंड लिखना भी शुरू कर दिया है। सभी खंडों को कुमाऊंनी में लिखने का लक्ष्य है।