घर में तुलसी की खेती करते उत्तराखंड आवासीय विवि के कुलसचिव डा. विपिन चंद्र जोशी।
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड आवासीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विपिन चंद्र जोशी का कहना है कि बाहरी राज्यों से लौट रहे प्रवासी अपने बंजर खेतों में तुलसी की खेती करके अच्छी कमाई कर सकते हैं। लॉकडाउन के दौरान डॉ. जोशी ने अपने आवास में ही कुछ गमलों में तुलसी की खेती की है। उन्होंने बताया कि तुलसी का तेल बाजार में आठ सौ रुपये से एक हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है जबकि इसका बीज भी काफी महंगा बिक जाता है। तीन महीने में ही तुलसी तैयार हो जाती है। बाहर से गांव लौटे युवा बंजर भूमि पर तुलसी की खेती करके तीन महीने में ही एक से दो लाख रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं।
डॉ. जोशी ने बताया कि आयुर्वेदिक दवा और सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनियों में तुलसी की मांग अधिक रहती है। कोरोना महामारी के समय आयुर्वेदिक कंपनियों में तुलसी की मांग बढ़ने की प्रबल संभावना है। तुलसी की खेती कम लागत और कम समय में अधिक आर्थिक लाभ दे सकती है। दस से 15 हजार रुपये खर्च करने से तीन महीने में ही एक से दो लाख रुपये का लाभ हो सकता है।
तुलसी के पौधों को अप्रैल, मई में लगाया जाता है। तुलसी की पौध में आसानी से कोई रोग भी नहीं लगता है। तुलसी का बीज मंडी में 200-300 रुपये प्रति किलो बिकता है। इसका तेल 800-1000 रुपये प्रति किलो बिकता है। तुलसी के पौधों के साल भर हरा भरा रहने पर उसके पत्तों को तीन-चार बार निकाल सकते हैं। एक एकड़ में केवल 120 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है। इसे कतार में 1.25 से 1.50 फिट की दूरी पर लगाया जाता है। डॉ. जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वरोजगार योजना के तहत दिए जा रहे अनुदान का लाभ उठाकर ग्रामीण युवा बंजर पड़े खेतों में तुलसी की खेती कर अपनी आर्थिक को मजबूत कर सकते हैं।