पर्यटन नगरी में भी कोतवाली कार्यालय, बैरक और भवनों का हाल बुरा है। कोतवाली का निर्माण अंग्रेज हुक्मरानों ने 115 साल पहले कराया था। जिस प्राचीन भवन में कोतवाली का कार्यालय चल रहा है, उसी भवन के पीछे की तरफ बैरक भी बनाया गया है।
जीर्णोद्धार न होने के कारण बैरक की छत क्षतिग्रस्त हो चुकी है। हल्की बारिश में भी पानी अंदर घुस जाता है। जिस कारण पुलिस कर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जबकि ब्रिटिशकालीन गेस्ट हाउस भवन को भी मरम्मत की दरकार है।
पर्यटन नगरी में अंग्रेज शासकों ने 1910 के आसपास कोतवाली भवन का निर्माण कराया था। यहां कुल 35 पुलिस कर्मचारी तैनाते हैं। जिनमें आठ आवासीय भवन हैं, जबकि बाकी के कर्मचारी बैरक में रहते हैं। बैरक भी कार्यालय के पीछे बनाया गया है।
कार्यालय के ठीक पीछे बना बैरक क्षतिग्रस्त होने के कारण हल्की बारिश में भी टपकने लगता है। बारिश के दौरान पानी अंदर घुस जाता है। जिस कारण मच्छर परेशान करते हैं। अधिकांश आवासीय भवन भी जीर्ण हालत में पहुंच चुके हैं, जबकि निकटवर्ती स्प्रिंग फील्ड में पुलिस का पुराना गेस्ट हाउस भी है।
यहां पुलिस विभाग के तमाम कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। गेस्ट हाउस अंग्रेजों द्वारा लकड़ी से बनाया गया था, लेकिन जीर्णोद्धार न होने के कारण लकड़ी गलने लगी है। पुलिस मैस भी पुराने भवन में बना हुआ है। टिनशेड के इस भवन में भी पानी घुसने की समस्या बनी रहती है। यही हाल रहा तो आने वाले एक दो वर्षों में यह भवन और जीर्ण हो जाएंगे और कभी भी दुर्घटना घट सकती है।