रैली को संबोधित करते गणेश दत्त ‘गरीब’।
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चकबंदी रैली को संबोधित करते हुए मुहिम से जुड़े गढ़वाल निवासी गणेश सिंह ‘गरीब’ ने कहा कि चकबंदी को लेकर अभी तक कोई भी सरकार गंभीर नहीं रही है और न ही सरकारों ने जंगली जानवरों के आतंक पर अंकुश लगाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। जिस कारण किसान खेती से विमुख हो रहे हैं। पहाड़ों में यदि अब भी चकबंदी योजना लागू नहीं हुई तो पहाड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने चकबंदी मुहिम की बात करने वाले उम्मीदवार को ही विधानसभा चुनाव में जिताने का आह्वान किया।
गरीब क्रांति अभियान और चकबंदी मॉडल समिति की ओर से यहां चकबंदी रैली का आयोजन किया गया। रैली सुबह रोडवेज स्टेशन से लेकर गांधी चौक तक निकली, इसके बाद गांधी चौक पर सभा हुई। मुख्य अतिथि गणेश सिंह सरकारों के रवैये को देखकर खासे नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि 1988 से चकबंदी मुहिम चल रही है, हर बार सरकारों ने झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया है। राज्य बनने के बाद उम्मीद थी, लेकिन निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि सरकार यदि ग्रामीणों की कुल जमीन के बदले कुछ भूमि चकों के रूप में दे दे तो इससे ग्रामीणों को लाभ मिल सकता था, कई स्थानों पर ग्रामीण आपसी सहयोग से यह काम कर रहे हैं।
सरकार ने इस बार विधेयक पास किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। खेती चौपट होने से पहाड़ पलायन का दंश झेल रहे हैं। चकबंदी के बगैर पहाड़ का भविष्य नहीं है। इसके लिए उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर चकबंदी मुहिम में सहयोग करने का आह्वान किया। केवलानंद तिवारी फकीर, डॉ. वेदप्रकाश, पूर्व एमएलसी बीडी शर्मा आदि ने भी विचार रखे। इस मौके पर छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, सत्यपाल नेगी, कपिल डोभाल, गोपाल सिंह देव आदि थे।